दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कबेंगलूरु। यहां गांधीनगर स्थित तेरापंथ सभा भवन में बुधवार को तेरापंथ महिला मंडल (तेमम) के तत्वावधान में स्वर्णोहम् कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेंगलूरु में मंडल के ५१ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुए इस कार्यक्रम में राज्यपाल वजुभाई वाला ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। साध्वीश्री कंचनप्रभाजी व मधुस्मिताजी के सान्निध्य में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर स्वर्णोहम् स्मारिका का विमोचन भी किया। इस मौके पर राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में उल्लेख है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं का अपमान होता है वह घर सुखी नहीं हो सकता। जीवनरुपी रथ को चलाने के लिए दोनों पहियों की समानता का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि संसार में रहना है तो घर की महिलाओंे की बात भी सुननी होगी। वजुभाई वाला ने कहा कि हमारी वैवाहिक संस्कृति में सात वचन तो लिए जाते हैं, लेकिन इन वादों पर अमल नहीं होता है। वर्तमान परिदृश्य में समाज व राष्ट्र में महिलाओं की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए व इनके सम्मान के अनेक उदाहरण देते हुए राज्यपाल ने कहा कि दया, त्याग और समझौते की प्रतिमूर्ति के रुप में एक संस्कारित नारी परिवारिक, सामाजिक ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर इतिहास भी रच देती है। राज्यपाल ने भगवान श्रीकृष्ण की माता देवकी व यशोदा, द्रोपदी, माता त्रिशला, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन सहित अनेक महिलाओं के नाम लेते हुए कहा कि महिलाएं कहीं, किसी से कमतर नहीं हैं। वे अपने आप को निर्बल नहीं समझें, क्योंकि नारी आज एक चिंगारी भी है। वजूभाई वाला ने कहा कि घर में खिच़डी, चावल और रोटी बनाने के साथ घर की चार दिवारी से निकलकर समाज के जरुरतमंदों के लिए सेवा प्रकल्पों को ब़ढा रही महिला आज भगवान महावीर की सच्ची अनुयायी व उनके आदर्शों को अपनाने वाली बन रही है। उन्होंने मानवता को सबसे ब़डा धर्म तथा जैन धर्म को सभी धर्मों में श्रेष्ठ धर्म बताते हुए कहा कि यहां जीवदया है तो यहां मानवता की सेवा भी है। २३ मिनट के अपने वक्तव्य में वजूभाई वाला ने भगवान महावीर के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि वे संपन्न राजा थे, उन्हांेने देश और दुनिया को धनवान बनाने के लिए त्याग नहीं किया था। आज जरुरत हमें उनके बताए मार्ग पर चलने की है व उनके सिद्धांतों को अपनाने की है। उन्होंने कहा कि आज हमारे लिए व भावी पी़ढी के लिए संस्कारों का सिंचन जरुरी हो गया है। राज्यपाल ने बेहद प्रसन्नचित भाव के साथ कहा कि तेरापंथ महिला मंडल देश का एकमात्र संगठन है जो कि समाजोत्थान के लिए विविध रचनात्मक कार्यों के साथ निरंतर गतिशील है। इससे पूर्व साध्वीश्री कंचनप्रभाजी ने वजूभाई वाला को संबोधित करते हुए कहा कि ‘आपकी आध्यात्मनिष्ठा भारतीय संस्कृति के प्रति प्रसंशनीय है, राष्ट्र को आप जैसे ही कर्णधारों की जरुरत है।’’ साध्वीश्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि कोई भी संगठन तभी मजबूत होता है जब उसके कार्यकत्ताओं में श्रद्धा, समर्पण और सहिष्णुता हो। नारी को शक्ति की प्रतीक बताते हुए कंचनप्रभाजी ने यह भी कहा कि तेमम ने इस दिशा में अपनी अनूठी पहचान और मिसाल कायम की है। साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने प्रलय सृजक नारी को सृष्टि का आईना बताते हुए कहा कि वह परिवार, समाज और विश्व की धुरी है। संसार की नींव एवं निर्मात्री एक शिक्षित नारी ही समग्र संसार का चरित्र ग़ढ सकती है। साध्वीश्री ने कहा कि तेमम एक्टिव और पॉवरफुल संस्था है, यहां महिलाओं की एकता और सकारात्मक सोच ने अनेक कीर्तिमान स्थापित कर मंडल को गौरवान्वित किया है। उन्होंने समस्त मंडल सदस्याओं का आह्वान करते हुए स्वस्थ चिंतन, विवेकपूर्ण निर्णय व मधुर व्यवहार को बरकरार रखते हुए सदैव संघ के प्रति समर्पित रहने की सीख भी दी। सभी का स्वागत मंडल की अध्यक्ष अनीता गांधी ने किया। मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमुद कच्छारा के शुभकामना संदेश का वाचन वीणा बैद ने किया। इस अवसर पर मंडल की वर्तमान एवं पूर्व अध्यक्षों को मेमेंटों भेंट कर राज्यपाल ने सम्मानित किया। राज्यपाल का सत्कार अनीता गांधी व सीमा श्रीश्रीमाल ने स्मृतिचिन्ह एवं साहित्य भेंट कर किया। कार्यक्रम का संचालन मंडल की मंत्री सीमा श्रीश्रीमाल व नीता गादिया ने संयुक्त रुप से किया। इस अवसर पर मंडल के विभिन्न राष्ट्रहित व सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के संदेश लिखी तख्तियां लिए सभी सदस्याओं ने ‘केशरिया परिधान’’ में ‘नारी मंे नवजोश जगाता..ऐसा मंडल मेरा हो..ऐसा मंडल..’’ की प्रस्तुति दी। मंडल की पूर्व कार्यकारिणी समितियों के द्वारा बीते वर्षो में हुए विभिन्न कार्यों से रुबरु कराने वाले कार्यों को वीडियो प्रजेंटेशन के माध्यम से दिखाया गया। पूर्व अध्यक्ष व पूर्व मंत्रियों ने अपने-अपने विचार भी रखे। इस अवसर पर जय तुलसी फाउण्डेशन के मुख्य न्यासी हीरालाल मालू, चेतना केंद्र के अध्यक्ष सोहनलाल माण्डोत, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष कन्हैयालाल गिि़डया, तेरापंथ महासभा के कर्नाटक प्रांत के प्रभारी दीपचंद नाहर, प्रकाशचंद लो़ढा व ज्ञानशाला के संयोजक प्रेम कोठारी सहित अनेक सभा-संस्थाओं से जु़डे पदाधिकारी व सदस्य तथा ब़डी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। सभी का आभार मंडल की मंत्री सीमा श्रीश्रीमाल ने जताया।

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