shradh 2018
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बेंगलूरु। श्राद्ध पक्ष दिवंगत परिजनों और पूर्वजों के स्मरण की विशेष अवधि है। इस दौरान श्राद्ध निकाला जाता है, दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे पितृदेव प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। उनकी प्रसन्नता से परिवार का कल्याण होता है। वहीं श्राद्ध में कुछ खास कार्यों का निषेध भी किया गया है। जहां तक संभव हो, श्राद्ध पक्ष में ऐसे कार्यों से दूर ही रहना चाहिए। जानिए उनके बारे में।

1. श्राद्ध पक्ष में सदाचार और पुण्य पर खास जोर दिया गया है। इस अवधि में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे पितृदेव को दुख हो। उनकी श्राद्ध तिथि को नहीं भूलना चाहिए। उस रोज अपने सामर्थ्य के अनुसार भोजन कराना चाहिए और दान करना चाहिए।

2. श्राद्ध पक्ष में संयम का विशेष महत्व है। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। नियमपूर्वक संयम का पालन करने से पितृदेव को प्रसन्नता होती है। माना जाता है कि इस अवधि में वे अपने सूक्ष्म रूप में धरती पर आते हैं और अपने कुल द्वारा किए गए कार्यों को देखते हैं। अच्छे कार्य उन्हें प्रसन्नता देते हैं और बुरे कार्य दुख।

3. श्राद्ध पक्ष में सात्विक भोजन ही करें। शास्त्रों में तामसी भोजन से सदैव दूर रहने के लिए कहा गया है। श्राद्ध पक्ष में तामसी भोजन करने वाला व्यक्ति पाप का भागी होता है। जिस व्यक्ति को श्राद्ध तिथि पर भोजन के लिए आमंत्रित करें, उसके लिए भी शास्त्रानुसार ही भोजन का प्रबंध करें।

4. श्राद्ध पक्ष में किसी को कटु वचन न बोलें, किसी का अनादर न करें और ऐसा कोई कार्य न करें जो नैतिकता के विरुद्ध हो। इस अवधि में क्रोध करने को बुरा माना गया है। अगर कोई याचक आए तो अपने सामर्थ्य के अनुसार उसे दान दें, लेकिन कभी अपमान न करें। जो श्रद्धा और संयमपूर्वक श्राद्ध निकालता है, उससे पितृदेव प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देकर जाते हैं।

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