नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शोपियां गोलीबारी मामले में मेजर आदित्य कुमार के खिलाफ सभी जांच पर २४ अप्रैल तक सोमवार को रोक लगा दी और कहा कि मेजर कुमार के साधारण सामान्य अपराधी की तरह व्यवहार नहीं किया जा सकता। मेजर कुमार के पिता लेफ्टिनेंट कर्नल करमवीर सिंह की याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचू़ड की पीठ के समक्ष जैसे ही शुरू हुई, अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने याचिका का समर्थन किया। वेणुगोपाल ने कहा कि सेना कानून तथा उच्चतम न्यायालय के फैसलों के परिप्रेक्ष्य में इस मामले में प्राथमिकी नहीं दर्ज की जा सकती।इस बीच जम्मू कश्मीर पुलिस ने शीर्ष अदालत के समक्ष जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश की जिसमें उसने कहा है कि प्राथमिकी में मेजर आदित्य के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाडे ने दलील दी कि अभी तक मेजर कुमार को प्राथमिकी में आरोपी के तौर पर नामजद नहीं किया गया है। पीठ ने पूछा कि क्या मेजर कुमार का नाम बाद में प्राथमिकी में जो़डा जाएगा, इस पर नफाडे ने कहा कि यह मामले की जांच पर निर्भर करेगा। इस पर पीठ ने नफाडे से व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ताकि आप उन्हें (मेजर कुमार को) बाद में नामजद कर सकें। आप (राज्य सरकार) उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते। अटॉर्नी जनरल ने भी नफाडे की दलील का पुरजोर विरोध किया। इस मामले में राज्य सरकार ने संविधान पीठ के पूर्व के फैसलों की अनदेखी की है।

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