शतावरी वैसे तो स्त्री-पुरुष दोनों के लिए ही उपयोगी व लाभप्रद गुणों से युक्त ज़डी है, फिर भी यह ्त्रिरयों के लिए विशेष रूप से गुणकारी एवं उपयोगी है। शतावरी एक चमत्कारी औषधि है, जिसका उपयोग कई रोगों के इलाज में किया जाता है। यह पौधा झा़डीनुमा होता है, जिसमें फूल व मंजरियां एक से दो इंच लम्बे एक या गुच्छे में लगे होते हैं और मटर के समान फल पकने पर लाल रंग के होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, शतावरी पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से ल़डने की क्षमता (इम्मुनिटि पॉवर) प्रदान करता है। इसे शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है। आधुनिक शोध भी शतावरी की ज़ड को हृदय रोगों में प्रभावी मानते हैं। शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग की जानकारी यहां दी जा रही है, जिसका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा। * यदि आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं तो शतावरी की ज़ड को खीर के रूप में पका लें, उसमें थो़डा गाय का घी डालें और ग्रहण करें। इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पाएंगे।* शतावरी की ताजी ज़ड को मोटा-मोटा कूट लें, इसका रस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें। इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगाएं, इससे लाभ प्राप्त होगा।* यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण-१.५ ग्राम, वसा के पत्ते का रस २.५ मिली, मिश्री के साथ लें।* प्रसूता ्त्रिरयों में दूध न आने की समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है।* यदि रोगी को मूत्र से संबंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है।* शतावरी मूल का चूर्ण -२.५ ग्राम, मिश्री -२.५ ग्राम को एक साथ मिलाकर पांच ग्राम ़की मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से स्वप्न-दोष में लाभ मिलता है।* शतावरी की ज़ड के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है।* वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का सेवन करने से ज्वर (बुखार) से मुक्ति मिलती है।* शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से संबंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।

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