बेंगलूरु। कर्नाटक प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डीयुरप्पा ने बुधवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा वीरशैव-लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक का दर्जा देने का निर्णय सिर्फ चुनावी तिक़डमबाजी है। उन्होंने मुख्यमंत्री सिद्दरामैया पर राज्य के लोगों को धर्म के नाम पर आपस में बांटने का आरोप भी चस्पां कर दिया। येड्डीयुरप्पा खुद लिंगायत समुदाय से आते हैं और राज्य में इस समुदाय पर उनकी पक़ड का हमेशा लोहा माना जाता रहा है। उन्होंने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में सरकार से जानना चाहा कि पूर्व में कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने से इन्कार कर दिया था तो विधानसभा चुनाव के ठीक पहले राज्य में कांग्रेस की ही सरकार को यह कदम उठाने की क्या जरूरत प़डी?येड्डीयुरप्पा ने कहा, ’’सिद्दरामैया भावनात्मक मुद्दों पर समाज को दो फा़ड करने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य में सिर्फ एक लिंगायत-वीरशैव समुदाय नहीं है। लिंगायतों को अलग धर्म मानने का कदम चुनावी जुगा़ड से अधिक कुछ नहीं है।’’ इस मुद्दे पर भाजपा का रुख स्पष्ट करते हुए येड्डीयुरप्पा ने कहा कि भाजपा इस मामले में अखिल भारतीय वीरशैव महासभा का जो भी निर्णय होगा, उसे स्वीकार करेगी। इसके साथ ही येड्डीयुरप्पा ने सिद्दरामैया से यह जानना चाहा कि क्या वह राज्य के सभी समुदायों की मांग पूरी कर सकते हैं? अगर नहीं तो लिंगायतों और वीरशैवों को अलग-अलग धर्म करार देने के पीछे उनकी मंशा क्या है? पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा, ’’राज्य के विभिन्न समुदाय अपने लिए सरकार से विभिन्न मांगें कर रहे हैं। क्या हम हर मांग पूरी कर सकते हें? आपकी मंशा क्या है? आपकी मंशा विभिन्न जातियों के बीच घृणा के बीज बोने के सिवा और क्या हो सकती है? अगर आप इन समुदायों के लिए वास्तव में चिंतित होते तो आप यह कह सकते थे कि हम वीरशैव महासभा के निर्णय का इंतजार करेंगे और इसके निर्णय का पालन करेंगे।’’ येड्डीयुरप्पा ने इसके साथ ही सिद्दरामैया की आलोेचना करते हुए कहा, ’’सिद्दरामैया इस बात के प्रतीक बन चुके हैं कि कोई व्यक्ति सिर्फ अपने राजनीतिक हित साधने के लिए कितना नीचे गिर सकता है।’’

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