अति-प्रदूषित बेलंदूर झील में लगी भीषण आग

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  • वर्ष-2015 से अब तक चार बार झील में लग चुकी है आग
  • बेंगलूरु की सबसे बड़ी झील बेलंदूर में रोजाना 480 मिलियन अपशिष्ट गिरता है
  • फरवरी-2017 में झील में लगी आग के बाद एनजीटी ने स्वसंज्ञान लिया था

बेंगलूरु। अति-प्रदूषित बेलंदूर झील में शुक्रवार को एक बार फिर आग लग गई और आग इतनी भयावह थी कि आग पर काबू पाने के लिए सेना की मदद लेनी पड़ी। बेलंदूर झील के येमलूर क्षेत्र के लोगों ने झील से आग और धुआं उठते देख स्थानीय प्रशासन को सूचित किया जिसके बाद सुबह लगी इस आग पर दोपहर करीब 12 बजे तक किसी प्रकार काबू पाया जा सका। हालांकि इसी दौरान झील के कुछ अन्य हिस्सों से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते झील के मध्यवर्ती क्षेत्र के बड़े हिस्से में आग लग गई। कुछ घंटों के दौरान ही दूसरी बार लगी इस आग पर काबू पाने में अग्निशमन दल और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि आग सबसे पहले सुबह देखी गई। आग झील में एमईजी सेंटर की ओर देखी गई जिसके तुरंत बाद सेना के हजारों जवान मेजर जनरल एनएस राजपुरोहित के नेतृत्व में आग पर नियंत्रण पाने में जुट गए। हालांकि आग के नियंत्रण होने के कुछ समय बाद जब दूसरी बार आग की लपटें उठीं तब झील का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। आग की लपटें झील के बीचोंबीच उठने लगी और धुआं कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता है।

एनजीटी लगा चुकी है फटकार

आग पर नियंत्रण पाने के लिए दमकल कर्मियों की कई टीमें पहुंची लेकिन आग का दायरा लगातार बढता रहा। इस दौरान बृहद बेंगलूरु महानगरपालिका (बीबीएमपी), कर्नाटक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केपीसीबी), कर्नाटक झील विकास निगम (केएलडीसी) आदि के वरिष्ठ अधिकारी भी झील के पास पहुंच गए। 910 एकड़ में फैली इस झील के प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने बीबीएमपी, केपीसीबी, केएलडीसी आदि को फटकार लगाई है, बावजूद इसके न तो झील में प्रदूषण नियंत्रण हो रहा है और ना ही आग लगने की घटनाएं रुक रही हैं।

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