मेलबर्न। अनुसंधानकर्ताओं के एक अध्ययन में पता चला है कि वन्यजीवों की गणना के पारंपरिक तरीकों की तुलना में ड्रोन से की जाने वाली गणना अधिक सटीक होती है। अनुसंधानकर्ताओं ने वन्यजीव की गणना के लिए रबर से बनी हुई बतख का इस्तेमाल ड्रोन की उपयोगिता और इसकी सत्यता की जांच के लिए किया। वहीं इसके मुकाबले लोगों के ऐसे अनुभवी समूह को भी रखा गया जो वन्यजीव की गणना करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड के जेराड होजसन ने बताया, कुछ वर्षों से ड्रोन का इस्तेमाल ऊपर से दिखने वाले जानवरों की निगरानी रखने के लिए जाता है, जिसमें हाथी, सील और घोसले में रहने वाले पक्षी शामिल हैं। होजसन ने बताया, हालांकि अभी तक वन्यजीव की गणना करने के मामले में ड्रोन की सत्यता स्पष्ट नहीं थी। उन्होंने कहा, हमें इस तकनीक की परख करने की जरूरत थी, जहां से हम सही जवाब हासिल कर पाएं। हमलोग वन्यजीव का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे क्योंकि हम किसी भी प्राणी की वास्तविक संख्या को लेकर कभी भी सुनिश्चित नहीं हो सकते थे। अनुसंधानकर्ताओं ने ऑस्ट्रेलिया में समुद्र के तट पर रबर की बत्तखों से नकली पक्षियों की कालोनी बनाई। इनकी गणना के लिए लोगों को भी रखा गया और ड्रोन को भी। जमीन से पक्षियों की गणना करनेवाले टेलिस्कोप या दूरबीन का उपयोग कर रहे थे। जबकि ड्रोन तट के ऊपर उ़ड रहा था। इस प्रतियोगिता में गणना की सटीकता के मामले में ड्रोन की जीत हुई।

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