चुनावों में इमरान कर बैठे यह बड़ी ‘गलती’ जो पड़ सकती है उनकी सरकार पर भारी

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Imran Khan Pakistan
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वे भ्रष्टाचार खत्म करने और ‘तब्दीली लाने’ के नारे के साथ सत्ता में आने का दावा कर रहे थे। अपर्याप्त संख्याबल उनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत हो सकता है।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में लोकतंत्र कितना मजबूत है, यह बताने की आवश्यकता नहीं, लेकिन दिखाने भर को जो लोकतांत्रिक सरकार चाहिए वह चुनावों के बाद अब तक नहीं बन सकी है। नया प्रधानमंत्री शपथ नहीं ले पाया है, जिसके बाद यह संशय बरकरार है कि 14 अगस्त को मुल्क का परचम कौन फहराएगा। इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीत चुकी हो, पर अब उनकी एक गलती उन्हीं पर भारी पड़ रही है।

दरअसल इमरान ने एक या दो नहीं बल्कि पांच सीटों से चुनाव लड़ा था ताकि उनकी पार्टी की सीटों की संख्या में ज्यादा से ज्यादा इजाफा हो जाए। अब जबकि सरकार बनाने की कवायद शुरू चुकी है और निर्दलीयों तथा अन्य के साथ गठजोड़ होगा, तो इमरान को चार सीटों से इस्तीफा देना होगा। इसका मतलब है कि पीटीआई की सीटें सीधे ही चार घट जाएंगी। इसका असर सरकार के स्वरूप पर पड़ सकता है। अभी तक उनके पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। अगर चार सीटें और गंवा बैठे तो सरकार की स्थिति डांवाडोल हो जाएगी।

विभिन्न न्यूज रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर इमरान सरकार बनाने का दावा करते हैं तो उन्हें कम से कम 136 सांसदों का समर्थन चाहिए। नतीजों के अनुसार, पीटीआई की झोली में 115 सीटें आई हैं। अगर वे कुछ छोटे दलों और निर्दलीयों को अपने पाले में कर लेंगे तो यह आंकड़ा बहुमत के आसपास पहुंच सकता है। इसी से सरकार की मुश्किलें कम नहीं होंगी। खुद की चार सीटें कम होने के बाद दूसरी पार्टियां सरकार पर दबाव बनाएंगी। ऐसे में इमरान स्वतंत्र होकर फैसले शायद ही ले पाएं।

वे भ्रष्टाचार खत्म करने और ‘तब्दीली लाने’ के नारे के साथ सत्ता में आने का दावा कर रहे थे। अपर्याप्त संख्याबल उनके लिए बहुत बड़ी मुसीबत हो सकता है। इसके अलावा अगर इन पार्टियों के गठबंधन में किसी मुद्दे को लेकर दरार आ गई तो सरकार गिरने का खतरा सदा बरकरार होगा। हालांकि पर्दे के पीछे सरकार बनाने और जोड़तोड़ की कवायद चल रही है। उम्मीद है कि फौज इमरान को प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंचा ही देगी।

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