आतंकियों से बेखौफ यह हिंदू महिला भी लड़ रही है पाकिस्तान में चुनाव

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Sunita Parmar Tharparkar
Sunita Parmar Tharparkar

कराची। यूं तो पाकिस्तान में लोकतंत्र कहने भर को है, क्योंकि बंटवारे के बाद आज तक फौज ही वहां प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सत्ता में रहती आई है। 25 जुलाई को पाकिस्तान में चुनाव हैं। वहां कई उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। आतंकी हाफिज सईद अपने उम्मीदवार उतार चुका है, इमरान खान शरीफ-जरदारी खानदान पर निशाना साध रहे हैं, वहीं सिंध के थारपारकर जिले की सुनीता परमार भी चुनाव लड़ रही हैं। 31 वर्षीया सुनीता हिंदू हैं और दलित समाज से आती हैं।

उन्हें किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो वे निर्दलीय खड़ी हो गईं। वे पीएस-56 सीट से चुनाव लड़ रही हैं और इन दिनों अपने प्रचार में जोर-शोर से जुटी हैं। उन्होंने वोट की अपील करते हुए सोशल मीडिया पर भी वीडियो पोस्ट किए हैं, जहां हजारों की तादाद में लोगों ने उनके हौसले की तारीफ की है, क्योंकि पाकिस्तान में किसी हिंदू महिला का चुनावों में खड़ा होना आसान काम नहीं है।

चुनावी मौसम में आतंकवादी भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे। वे पेशावर में एक रैली के दौरान आत्मघाती हमला कर 20 लोगों की जान ले चुके हैं। उन्होंने वहां के एक मशहूर राजनेता को भी मौत के घाट उतार दिया। मगर इन सबसे बेखौफ सुनीता प्रचार में जुटी हैं।

उनका कहना है कि पाकिस्तान सरकार ने लोगों के जीवन स्तर की बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया। यहां तक कि महिलाओं के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी है। उन्होंने अपने क्षेत्र में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का वायदा किया है।

थारपारकर पाकिस्तान का वह जिला है जहां सबसे ज्यादा तादाद में हिंदू रहते हैं, परंतु राजनीति में उनका प्रतिनिधित्व बहुत कम है। अब चुनाव नतीजों के बाद ही मालूम होगा कि सुनीता परमार की मेहनत कितनी कामयाब हुई।

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