ह्यूस्टन/नई दिल्ली/एजेन्सी ईरान पर प्रतिबंध लागू होने से पहले अमेरिका से भारत की कच्चे तेल की खरीद रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जून में अमेरिका से कच्चे तेल का आयात रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह आंक़डा बीते साल के मुकाबले लगभग दोगुने का है। एशियाई देशों ने तेल की आपूर्ति के लिए ईरान और वेनेजुएला की बजाय अमेरिका का रुख किया है, जो ट्रंप प्रशासन के लिए एक तरह से जीत की तरह है। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से ईरान से नवंबर तक किसी भी तरह के आयात को पूरी तरह खत्म करने को कहा है। ऐसे में भारत की ओर से उससे तेल की खरीद में इजाफा होना अमेरिका के लिए क्रूड के जरिए राजनीतिक हितों को साधने के प्रयास में सफलता की तरह है। ताजा सरकारी आंक़डों के मुताबिक हर दिन १.७६ मिलियन बैरल कच्चे तेल का निर्यात कर अमेरिका क्रूड के ब़डे एक्सपोर्ट्स में से एक हो गया है। यह आंक़डा अप्रैल महीने का है। आंक़डों के मुताबिक जुलाई तक अमेरिका के प्रडयूर्स और ट्रेडर्स १५ मिलियन बैरल क्रूड ऑइल भारत भेजेंगे, जबकि २०१७ में यह आंक़डा महज ८ मिलियन बैरल ही था। यदि अमेरिका से आने वाले सामान पर चीन ने टैरिफ में इजाफा किया तो फिर भारत की ओर से अमेरिकी कच्चे तेल का आयात ब़ढ सकता है। चीन के टैरिफ के चलते भारत को फायदा होगा क्योंकि अमेरिका को कीमतें घटानी प़ड सकती हैं। इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन में फाइनैंस हेड ए.के. शर्मा ने कहा, ’’अमेरिकी क्रूड की मांग में इसलिए इजाफा हुआ है क्योंकि उसकी कीमत कम है। यदि चीन की ओर से अमेरिकी तेल के आयात में कमी की जाती है तो यह गिरावट और ब़ढ सकती है। ऐसा होता है तो भारत की ओर से क्रूड के इंपोर्ट में और इजाफा होगा।’’

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