चंडीग़ढ। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने रविवार को कहा कि विश्वविद्यालयों को देश में उत्कृष्ट संस्थान बनना चाहिए। नायडू ने २१वीं सदी के परिप्रेक्ष्य में पाठ्यक्रम और शैक्षणिक कार्यक्रमों की समीक्षा करने पर जोर दिया ताकि युवा आवश्यक कौशल से लैस होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान कर सकें। उन्होंने कहा, आज सुधारों को लेकर देश में व्यापक सहमति है। सुधार समय की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीन शब्दों की सलाह दी है -सुधार, प्रदर्शन और बदलाव। देश में बदलाव की काफी जरूरत है। करीब ६५ फीसदी भारतीय आबादी ३५ वर्ष से कम उम्र की है।उन्होंने कहा, हमें जनसांख्यिकी फायदा है। युवा पी़ढी को उचित राह दिखाई जानी चाहिए, उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जाना चाहिए और यह विश्वविद्यालयों का काम है, संस्थानों तथा प्रौद्योगिकी एवं अन्य संस्थानों का काम है। नायडू पंजाब विश्वविद्यालय के ६७वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, विश्वविद्यालयों को उत्कृष्टता केंद्र बनने का लक्ष्य तय करना चाहिए। वहां पहुंचने के लिए आपको कठिन प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर छात्र को मातृभाषा में बोलने और बातचीत करने का प्रयास करना चाहिए। नायडू ने कहा, मैं किसी भी भाषा के खिलाफ नहीं हूं। आप जितनी चाहें भाषाएं सीख सकते हैं। मेरा मानना है कि राज्य को हर किसी के लिए मातृ भाषा अनिवार्य कर देना चाहिए।

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