acharya mahashraman ji
acharya mahashraman ji

चेन्नई/दक्षिण भारत। दक्षिण की धरा चेन्नई के माधावरम् में तेरापंथ के आचार्यश्री महाश्रमण अपना पहला चातुर्मास कर रहे हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में पर्युषण के मौके पर हजारों श्रद्धालु पूरे दिन धर्माराधना कर रहे हैं। सूर्योदय से ही प्रवास स्थल पर श्रद्धालुओं का तांता लग रहा है। सोमवार को पर्युषण महापर्व का चौथा दिन ‘वाणी संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया।

‘महाश्रमण समवसरण’ में सर्वप्रथम महाश्रमणी साध्वीप्रमुखाजी से श्रद्धालुओं को संबोधन प्राप्त हुआ। उसके उपरान्त विभिन्न आध्यात्मिक विषयों पर साध्वीवृंद द्वारा अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए गए। आचार्यश्री की मंगल सन्निधि में मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने आचार्यश्री महाश्रमणजी द्वारा रचित गीत ‘सत्य के खातिर समर्पित प्राण है’ गीत का सुमधुर संगान के माध्यम से श्रद्धालुओं को उत्प्रेरित किया।

पर्युषण के दौरान आचार्यश्री के विशेष उद्बोधन में ‘भगवान महावीर की अध्यात्म यात्रा’ के क्रम में आचार्यश्री ने मरिचिकुमार के भव सहित कुल सोलहवें भव तक की कथा का रोचक वर्णन किया। ‘वाणी संयम दिवस’ पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि वाणी एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम भाषा होती है। भाषा लिखित भी होती है तो मौखिक भी होती है। बोलना होता है। आदमी मौन भी कर लेता है और बोल भी लेता है, वह कोई खास बात नहीं होती है, किन्तु आदमी बोलते हुए भी मौन कर ले, वह विशेष बात होती है।

उन्होंने कहा, बोलना कोई बड़ी बात नहीं, विवेकपूर्ण बोलना बड़ी बात होती है। आदमी को कटु नहीं, मिष्टभाषी बनने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अपनी वाणी को संयमित रखते हुए कठोर अथवा कटु भाषा से बचने का प्रयास करना चाहिए। वाणी में विनय हो, मिष्ट वाणी हो। भाषा में अच्छे शब्दों का प्रयोग हो तो वाणी और भी सुंदर बन सकती है। मिष्ट के साथ भाषा शिष्ट हो तथा शिष्ट के साथ भाषा विशिष्ट हो जाए तो वह वाणी विशेष शोभित हो सकती है।

उन्होंने कहा, वाणी एक रत्न है, वचन दुर्ग है और होंठ दरवाजे होते हैं। आदमी को सोच-सोचकर बोलने का प्रयास करना चाहिए। आदमी अपनी वाणी का संयम करे और सारगर्भित और यथार्थपूर्ण बोलने का प्रयास करे तथा यथासंभव मौन भी करने का प्रयास करे तो वाणी की विशेष साधना हो सकती है। मंगल प्रवचन के पश्चात् अनेक श्रद्धालुओं ने अपनी धारणा के अनुसार आचार्यश्री से तपस्याओं का प्रत्याख्यान किया।

LEAVE A REPLY