पटना। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को अरबों रुपए के बहुचर्चित चारा घोटाले के तीसरे मामले में भी बुधवार को सजा हो गई जबकि उनके खिलाफ अभी भी दो अन्य मामले लंबित हैं। यादव को झारखंड की राजधानी रांची स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष न्यायाधीश एसएस प्रसाद की अदालत ने चाइबासा कोषागार से ३३ करो़ड ६२ लाख रुपए की अवैध निकासी के मामले ६८ए/९६ में बुधवार को पांच साल सश्रम कारवास और १० लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। इस मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र, पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और आरके राणा को भी पांच-पांच साल सश्रम कारावास की सजा के साथ ही उन पर १०-१० लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। इससे पूर्व ०६ जनवरी २०१८ को सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह की अदालत ने देवघर कोषागार से ८४.५४ लाख रुपए की अवैध निकासी के मामले ६४ए/९६ में सा़ढे तीन साल कारावास और १० लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस मामले में २३ दिसंबर २०१७ को यादव समेत १६ अभियुक्तों को दोषी करार दिया गया था। वहीं, सीबीआई के विशेष न्यायाधीश प्रवास कुमार सिंह की अदालत ने ३० सितंबर २०१३ को चारा घोटाले के चाइबासा कोषागार से ३७.७० करो़ड रुपए की अवैध निकासी के मामले २०ए/९६ में दोषी करार दिए जाने के बाद पांच साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को यादव ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। चारा घोटाले के इन तीन मामलों में सजा होने के बाद यादव के खिलाफ अभी भी दो अन्य मामले दुमका कोषागार से ३.३१ करो़ड रुपए की अवैध निकासी का मामला ३८ए/९६, और डोरंडा कोषागार से १३९.३९ करो़ड रुपए की अवैध निकासी का मामला न्यायालय में लंबित है।उल्लेखनीय है कि चाइबासा के तत्कालीन उपायुक्त अमित खरे ने २७ जनवरी १९९६ को चारा घोटाले का रहस्योद्घाटन किया था। पिछले दो दशक से अधिक समय से चल रहे इस मामले की सुनवाई तेजी से पूरा करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने ०८ मई २०१७ को घोटाले के हर मामले को अलग-अलग चलाने की सीबीआई की दलील को स्वीकार कर लिया। अदालत ने नौ महीने के भीतर यादव के खिलाफ मुकदमों को ट्रायल पूरा करने का भी आदेश दिया।

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