नई दिल्ली। इन दिनों बांग्लादेशी घुसपैठिए, रोहिंग्याओं का अवैध कब्जा और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की चर्चा पूरे देश में हो रही है। विभिन्न अखबार, टीवी चैनल, सोशल मीडिया और चाय की थड़ियों तक पर एनआरसी छाया हुआ है। इन सबके बीच एक और मांग उठ रही है। सोशल मीडिया पर हजारों की तादाद में लोग टिप्पणी कर चुके हैं कि अब देश को चीन की तरह एक सख्त जनसंख्या नीति लागू करनी चाहिए। भारत में ‘हम दो-हमारे दो’ का नारा सिर्फ कुछ परिवारों तक सीमित नहीं होना चाहिए।

यह अनिवार्य रूप से सब पर लागू किया जाए। चाहे बांग्लादेश के घुसपैठिए हों या म्यांमार से आए रोहिंग्या, किसी को भी इस कानून से छूट न हो। अगर किसी की नागरिकता विचाराधीन है तो भी उस पर बाध्यता हो कि वह देश के इस कानून का अनिवार्य रूप से पालन करे। अन्यथा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। क्योंकि:

1. पिछले दिनों बांग्लादेश से एक खबर आई कि जहां म्यांमार से आए रोंहिग्या कैंप लगाकर रह रहे हैं, वहां के हालात बेहद खराब हैं। खाने, पीने, रहने तक की मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन इतनी तकलीफों के बावजूद उन कैंपों में हर महीने हजारों की तादाद में बच्चों का जन्म हो रहा है। उन्हें इस बात की कोई चिंता ही नहीं कि जिस शिशु को वे दुनिया में ला रहे हैं, उसे पैदा होते ही किन गंभीर समस्याओं का सामना करना होगा। रोहिंग्याओं में परिवार नियोजन का चलन नहीं है। भारत के कई इलाकों में रोहिंग्या अवैध कब्जा करके बैठे हैं। अगर प्रजनन का यही क्रम जारी रहा तो आने वाले समय में हालात विस्फोटक हो जाएंगे।

2. बांग्लादेशी घुसपैठियों में ज्यादातर लोग बहुत कम शिक्षित होते हैं। उनके पास आर्थिक भविष्य की कोई योजना नहीं होती। जब ये किसी देश में जड़ जमाकर बैठ जाएंगे तो भविष्य में उसकी अर्थव्यवस्था को चकनाचूर कर देंगे। चूंकि खुद बांग्लादेश उनके बोझ से दबा हुआ है। उसके मंत्री कह चुके हैं कि वे अवैध बांग्लादेशियों को नहीं लेंगे। अब यह भारत की समस्या है।

जब तक किसी की नागरिकता सिद्ध न हो, उसे घुसपैठिया नहीं कहा जा सकता, लेकिन हमें इस बात का पूरा हक है कि अपने नागरिकों के हितों का ध्यान रखें। देश पहले से ही अतिजनसंख्या से जूझ रहा है। उसके बाद हम लाखों की तादाद में अवैध तौर पर आए बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं को नहीं पाल सकते। भविष्य में ये अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था को ध्वस्त कर देंगे।

3. नब्बे के दशक से लेकर आज तक भारत में परिवार नियोजन का काफी प्रचार हुआ है। भारतीय परिवार अब इससे परिचित हो चुके हैं। देश की अर्थव्यवस्था और उन परिवारों को इसका लाभ भी मिल रहा है, परंतु अवैध रोहिंग्या एवं बांग्लादेशी घुसपैठियों को इस देश की बेहतरी से कोई मतलब नहीं है।

कालांतर में कई संगठन उन्हें भोजन, आवास, चिकित्सा, शिक्षा, बिजली, पानी और नागरिकता देने की मांग करने लगेंगे। इन सबका भार देश के आम इनसान की जेब पर पड़ेगा। वो यह दोहरी मार क्यों भुगते? इसलिए अब देश में लोग मांग करने लगे हैं कि समय रहते दो बच्चों का कानून बनाया जाए और सख्ती के साथ इसे लागू किया जाए। अगर किसी शरणार्थी को ऐसा कानून अपनी परंपराओं व मान्यताओं के खिलाफ लगता है, तो बेहतर होगा कि वह अपने देश में खुश रहे।

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