रोहिंग्या सांकेतिक तस्वीर
रोहिंग्या सांकेतिक तस्वीर

नई दिल्ली। देश के कई इलाकों में फैल चुके रोहिंग्या घुसपैठिए अब लद्दाख तक जा पहुंचे हैं। वे यहां बसने की तैयारी कर रहे हैं। यह खुलासा एक खुफिया रिपोर्ट में हुआ है जो गृह मंत्रालय को भेजी गई है। इसके बाद देश में यह मांग की जा रही है कि शांत और सुंदर लद्दाख को घुसपैठियों से मुक्त किया जाए, अन्यथा यहां भी कश्मीर घाटी जैसी समस्याएं पैदा होने लगेंगी। पिछले दिनों एक रिपोर्ट में कहा गया था कि उत्तर भारत के कई इलाकों में विरोध का सामना करने के बाद रोहिंग्या घुसपैठियों के झुंड दक्षिणी राज्यों में जा रहे हैं।

अब एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया है कि रोहिंग्या सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ने के लिए लद्दाख का रुख कर रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कम से कम 55 रोहिंग्या लद्दाख पहुंच चुके हैं। म्यांमार से बांग्लादेश और भारत में दाखिल हुए रोहिंग्याओं के बारे में प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों में कहा गया है कि भविष्य में ये देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं।

केंद्र सरकार के कई मंत्री भी कह चुके हैं कि रोहिंग्या भारत में शरणार्थी नहीं हैं। कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए इन्हें म्यांमार भेज दिया जाएगा। बता दें कि म्यांमार के रखाइन में हिंसा भड़कने के बाद वहां रहने वाले रोहिंग्या लाखों की तादाद में बांग्लादेश पहुंचे। उनमें से कई भारत आकर यहां के राज्यों में फैल गए। म्यांमार में भी इन पर काफी आरोप लगते रहे हैं। रिपोर्टों में यह कहा गया है कि कुछ रोहिंग्या पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के संपर्क में रहे हैं।

पिछले दिनों भारत ने सात रोहिंग्याओं को कानूनी प्रक्रिया के तहत म्यांमार भेज दिया। अब एक अन्य समूह को म्यांमार भेजने की प्रक्रिया चल रही है। बांग्लादेश पहले ही से गरीबी और भारी जनसंख्या के बोझ से दबा हुआ है। वहां लाखों की तादाद में आकर रोहिंग्या बस रहे हैं। इससे उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है। रोहिंग्याओं को स्वदेश भेजने के लिए बांग्लादेश भी म्यांमार से बात कर रहा है।

सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लद्दाख
लद्दाख पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। देश-विदेश से काफी लोग यहां आकर सुकून महसूस करते हैं। यहां की आबादी का बड़ा हिस्सा बौद्ध धर्म को मानता है। लद्दाख के लोग अपनी संस्कृति से बहुत प्रेम करते हैं। सामरिक क्षेत्र से भी यह इलाका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि चीन और पाकिस्तान की इस पर नजर है। वहीं रोहिंग्याओं की भूमिका संदिग्ध रही है। भारत के सुरक्षाबल कश्मीर घाटी में बहुत कुर्बानियां दे चुके हैं। ऐसे में लद्दाख जैसे इलाकों में घुसपैठियों को पनाह देना खतरे से खाली नहीं है।

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