rampal baba
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हिसार। सतलोक आश्रम हत्याकांड में हिसार की अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए रामपाल के लिए मंगलवार को सजा का ऐलान हुआ। उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। उसे ‘मरते दम तक जेल’ में ही रहना होगा। उम्रकैद के अलावा रामपाल पर एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। रामपाल के साथ 15 दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई। हिसार की विशेष अदालत रामपाल सहित उसके 26 अनुयायियों को पहले ही दोषी करार दे चुकी है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अदालत ने जेल में ही सजा सुनाई।

वर्ष 2014 के इस कांड से जुड़े दो मामलों में रामपाल और उसके कुछ सहयोगियों को 11 अक्टूबर को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने केस नं. 429 में रामपाल समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया था। उसी मामले में मंगलवार को सजा सुनाई गई है। वहीं केस नं. 430 में रामपाल समेत 13 आरोपी दोषी करार दिए गए थे। उसमें सजा का ऐलान 17 अक्टूबर को होगा। इसके मद्देनजर हिसार में धारा 144 लागू की गई। यहां भारी पुलिसबल तैनात किया गया।

चार साल से जेल में बंद
बता दें ​कि इंजीनियर से बाबा बना रामपाल नवंबर 2014 से जेल में बंद है। उस पर छह लोगों की हत्या से जुड़े दो मामले चल रहे थे जिनमें वह दोषी करार​ दिया जा चुका है। हिसार के बरवाला शहर के करीब उसका सतलोक आश्रम है जहां नवंबर 2014 में उसके समर्थकों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई थी। उस दौरान छह लोग मारे गए थे।

हालांकि हिसार की अदालत ने उसे अगस्त 2017 में लोगों को बंधक बनाने और गैर-कानूनी ढंग से इकट्ठा करने के दो मामलों में बरी कर दिया था। वहीं हत्या के दो मामलों में 11 अक्टूबर, 2018 को दोषी करार दिया गया। खुद को संत कबीर का अवतार कहने वाला रामपाल कभी हरियाणा के सिंचाई विभाग में इंजीनियर था। वर्ष 1996 में इस्तीफा देकर वह बाबा बन गया और लोगों को प्रवचन देने लगा।

विवादित टिप्पणी पड़ी भारी
समय के साथ रामपाल के समर्थकों की तादाद बढ़ती गई। साथ ही उसके विवादित बोल भी बढ़ते गए। वह अक्सर दूसरों की धार्मिक मान्यताओं पर गलत टिप्पणियां करता था। वर्ष 2006 में एक विवादित टिप्पणी के बाद उसके समर्थकों और अन्य लोगों में टकराव हो गया। इससे एक महिला की मौत हो गई। उस मामले में रामपाल को 22 महीने जेल में बिताने पड़े। वह अप्रेल 2008 में जेल से छूटा लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद पेश नहीं हुआ।

नवंबर 2014 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा रामपाल को गिरफ्तार कर पेश करने के आदेश दिए गए थे। पुलिस उसे गिरफ्तार करने आई तो सतलोक आश्रम में भारी बवाल मचा। रामपाल की निजी सेना और उसके समर्थकों ने भयंकर उत्पात मचाया। इससे पांच महिलाओं और एक शिशु की मौत हो गई।

प्रशासन ने लिया सबक
इस मामले में प्रशासन ने अपने पूर्व अनुभवों से सबक लेते हुए काफी चौकसी बरती। जहां हिसार में धारा 144 लागू कर किसी भी उपद्रव से निपटने के ​इंतजाम कर लिए थे, वहीं आसपास के जिलों से आ रहे लोगों पर भी सख्त नजर थी। पिछले साल गुरमीत राम रहीम के मामले में हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन की काफी आलोचना हुई थी, इसलिए रामपाल के मामले में प्रशासन पहले से ही काफी मुस्तैद था।

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