नई दिल्ली। कांग्रेस के रामचंद्र राव और तेलुगू देशम पार्टी के सीएम रमेश को राज्यसभा में आंध्रप्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग पर विरोध प्रदर्शन करने के कारण दिनभर के लिए निलंबित कर दिया गया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने शून्यकाल में आंध्रप्रदेश का मुद्दा उठाए जाने पर राव को एक दिन के लिए राज्यसभा की कार्यवाही से निलंबित कर दिया था। सुबह कार्यवाही शुरू हुई तो सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आ़जाद ने कश्मीर का मुद्दा उठाया तो कांग्रेस के राव हाथ में एक पोस्टर लेकर आए और वह सभापति के आसन के पास जाकर चुपचाप ख़डे हो गए। उस पोस्टर पर लिखा आंध्रप्रदेश सरकार के साथ न्याय हो। नायडू ने क़डे स्वर में राव को चेतावनी दी कि वे अपनी सीट के पास जाएं, अपनी बात कहने का यह कोई तरीका नहीं है।नायडू ने राव को आखिरी बार चेतावनी दी लेकिन इसका कोई असर नहीं होते देख उन्होंने कांग्रेस सदस्य को नियम के तहत राव को दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही से निलंबित कर दिया तब राव अपना पोस्टर लेकर सदन से बाहर चले गए। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने के बाद उप सभापति पीजे कुरियन ने जब आम बजट पर चर्चा शुुरु करने के लिए कांग्रेस के पी चिदंबरम का नाम पुकारा तो रमेश अपने साथी सदस्यों के साथ आसन के समक्ष आ गए और नारेबाजी करने लगे। कुरियन ने रमेश को नियम २५५ के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी देते हुए उन्हें अपनी सीटों पर जाने के लिए कहा। उप सभापति ने सदन के वरिष्ठ सदस्यों से भी रमेश और उनके साथियों को अपनी अपनी सीटों पर भेजने के लिए सहयोग करने की अपील की। इस बीच सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि सुबह इसी मुद्दे पर उनकी पार्टी की एक सदस्य को निलंबित किया गया है। इसलिए ऐसी ही कार्रवाई तेदेपा सदस्यों पर भी की जानी चाहिए। इसके बाद कुरियन ने नियम २५५ का उल्लेख करते हुए रमेश को सदन की कार्रवाई से दिनभर के लिए निलंबित कर दिया और बाहर जाने को कहा लेकिन रमेश बाहर नहीं गए और जोर जोर से नारे लगाने लगे। इस पर उन्हें बाहर निकालने के लिए पांच मार्शल बुला लिए गए।

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