nirmala sitharaman
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। राफेल विमान सौदे पर शुक्रवार को संसद में खूब हंगामा हुआ। इस सौदे के संबंध में एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सरकार पर कई आरोप लगाए, जिनका रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में जवाब दिया। उन्होंने अखबार की रिपोर्ट को एकपक्षीय करार देते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। रक्षा मंत्री ने विपक्ष को जवाब दिया कि यह गड़े मुर्दे उखाड़ने जैसा है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों खेल रहा है और देश की वायुसेना को मजबूत नहीं होने देना चाहता।

गौरतलब है कि एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर में दावा किया गया था कि जब भारत-फ्रांस के बीच राफेल सौदे के लिए चर्चा हो रही थी तो रक्षा मंत्रालय के समानांतर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) भी बातचीत कर रहा था। अखबार ने इसके लिए तत्कालीन रक्षा सचिव मोहन कुमार की एक नोटिंग का हवाला दिया है। खबर के मुताबिक, उसमें रक्षा सचिव ने तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को चिंता जाहिर की थी। इस खबर को विपक्ष ने हाथोंहाथ लिया और सरकार के खिलाफ दोबारा मोर्चा खोल दिया।

दूसरी ओर, निर्मला सीतारमण ने इस खबर को एकपक्षीय करार दिया। उन्होंने कहा कि अखबार ने रक्षा सचिव का नोट तो प्रकाशित किया, लेकिन उसके नीचे मनोहर पर्रिकर का जवाब प्रकाशित नहीं किया गया। रक्षा मंत्री के मुताबिक, पर्रिकर ने अपने जवाब में स्पष्ट कर दिया था कि चिंता की कोई बात नहीं है, सबकुछ ठीक है। निर्मला सीतारमण ने राफेल सौदे में पीएमओ के हस्तक्षेप करने के सभी आरोपों को नकारा। उन्होंने अखबार के लिए कहा कि उसने पूरा सच पेश नहीं किया।

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर जोरदार शब्दबाण छोड़ते हुए कहा कि वह विदेशी ताकतों के हाथों खेल रही है और देश को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि पीएमओ द्वारा विषयों के बारे में समय-समय पर जानकारी लेना हस्तक्षेप नहीं कहा जा सकता। रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि संप्रग सरकार के शासनकाल में सोनिया गांधी की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) का निर्माण किया गया था। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल दागा, उसका पीएमओ में कितना हस्तक्षेप था? रक्षा मंत्री ने कहा कि तब एनएसी एक तरह से पीएमओ चला रही थी।

बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कई बार राफेल सौदे पर सवाल उठा चुके हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खरगे इस मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराने की मांग कर चुके हैं। वहीं रक्षा मंत्री ने उक्त रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले अखबार को पत्रकारिता के सिद्धांतों हवाला देते हुए कहा कि पर्रिकर के जवाब को भी स्थान मिलना चाहिए था।

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