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नई दिल्ली। वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने राफेल ​विमानों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इन विमानों को देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा के लिए अहम बताया है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान से उपजी चुनौतियों के मद्देनजर राफेल को बेहद जरूरी बताया है। वायुसेना प्रमुख ने कहा है कि हमारे ये दोनों पड़ोसी देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। साथ ही वे ​अपने विमानों का आधुनिकीकरण कर रहे हैं। अगर वायुसेना को राफेल विमान मिले तो हम इनके ​जरिए मुश्किलों का सामना कर पाएंगे।

वायुसेना प्रमुख धनोआ ने ‘भारतीय वायुसेना की संरचना, 2035’ विषय पर आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि राफेल और S-400 के जरिए सरकार वायुसेना को मजबूत बनाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना के पास 42 स्क्वॉड्रन के मुकाबले 31 विमान ही हैं। धनोआ ने कहा कि यदि यह तादाद 42 हो तो भी पर्याप्त नहीं होगी।

वायुसेना प्रमुख धनोआ ने चीन से पैदा हुईं चुनौतियों पर कहा कि पिछले एक दशक में चीन ने भारत के निकटवर्ती क्षेत्र में सड़कें, रेल और हवाईक्षेत्र का तेजी विस्तार किया है। धनोआ ने कहा कि चीन की वायुसेना के पास करीब 1,700 एयरक्राफ्ट हैं। इनमें से 800 फोर्थ जेनरेशन के विमान हैं। धनोआ ने कहा कि ये विमान हमारे खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं। हमारे इस पड़ोसी के पास पर्याप्त संख्या में लड़ाकू विमान मौजूद हैं।

वहीं पश्चिमी सरहद की बात करें तो इधर पाकिस्तान भी अपने विमानों को लगातार अपग्रेड कर रहा है। उसने एफ-16 विमानों को अपग्रेड कर लिया है। इसके अलावा उन्हें अगली जनरेशन में बदल रहा है। चीन भी अपने ​विमानों को लगातार बदलता जा रहा है। ऐसे में भारत के लिए यह जरूरी है कि वह तैयार रहे। वायुसेना प्रमुख धनोआ ने कहा कि हमें किसी प्रकार के संघर्ष की स्थिति को रोकने के लिए पूरी तैयारी करनी होगी, ताकि यदि दो मोर्चे पर भी लड़ना पड़े तो हम तैयार रहें। उन्होंने राफेल जैसे विमान को वायुसेना के लिए बहुत जरूरी माना है।

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