चेन्नई/दक्षिण भारतशनिवार को तमिलनाडु स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरु की गई आयुष्मान भारत योजना में विलय कर दिया गया। राज्य सरकार ने राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से शुरु की गई मुख्यमंत्री समग्र स्वास्थ्य बीमा योजना का प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना के साथ विलय करने के आपसी समझौते पर हस्ताक्षर किए। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य बीमा योजना वर्ष २००९ में उस समय शुरु की गई थी जब राज्य के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि थे।राज्य स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अभी तक १.५७ करो़ड परिवार इससे काफी लाभान्वित हुए हैं। इस योजना के तहत राज्य के प्रत्येक परिवार को प्रत्येक वर्ष इलाज के लिए ५ लाख रुपए तक देने का प्रावधान था। इस स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में तमिलनाडु स्वास्थ्य प्रणाली परियोजना (टीएनएचएसपी) पूरे देश के लिए एक आदर्श बीमा योजना बन कर उभरी। कई राज्यों ने राज्य सरकार की इस योजना को अपने यहां लागू किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरु की गई आयुष्मान योजना के तहत समाज के आर्थिक और सामाजिक रुप से वंचित वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा देने का प्रावधान है। इसमें समाज के सभी वर्ग के लोगों को सरकार की ओर से समुचित उपचार देने का प्रावधान है और यही कारण है कि राज्य सरकार ने अपनी बीमा योजना का इसमें विलय करने का निर्णय लिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भाष्कर ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा शुरु की गई आयुष्मान भारत योजना में सभी ऐसे लोगों को बेहतर इलाज के लिए बीमित करने का प्रावधान है जो राज्य सरकार द्वारा दी जा रही स्वास्थ्य योजना के तहत लाभान्वित हो रहे थे। इसलिए लोगों तक बेहतर ढंग से इस योजना को पहुंचाने के लिए सरकार ने अपनी बीमा योजना का केन्द्र सरकार की योजना में विलय करने का निर्णय लिया है।उमा माहेश्वरी ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत १,०२७ बीमारियों और १५७ प्रकार की चिकित्सकीय जांच के लिए तथा ८ विभिन्न प्रकार की सर्जरी के लिए बीमा राशि देने का प्रावधान है। इस योजना के तहत जटिल सर्जरी के लिए सरकार की ओर से ३२ लाख रुपए तक की बीमा राशि दी जाएगी। विलय होने के बाद राज्य के सरकारी अस्पतालों के साथ ही राज्य से बाहर के कुछ चुनिंदा अस्पतालों में भी इस योजना का लाभ उठाया जा सकेगा। विलय के लिए आपसी समझौते पर हस्ताक्षर करने के अवसर पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री सी विजय भाष्कर, राज्य स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव डॉ जे राधाकृष्णन एवं स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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