reserve bank of india
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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया। इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। बुधवार को बैंक ने मौद्रिक नीति समीक्षा पेश की। उसने चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। आरबीआई की छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय समीक्षा बैठक हुई थी, जिसमें उक्त फैसला किया गया। इस फैसले का सीधा असर आम आदमी की जेब पर होगा। इससे आपकी ईएमआई कम नहीं होगी, लेकिन कार और होमलोन महंगे भी नहीं होंगे।

आरबीआई की रिवर्स रेपो दर 6.25 प्रतिशत और बैंक दर 6.75 प्रतिशत है, जो पुरानी दरों पर ही कायम हैं। इस तरह एमपीसी द्वारा चालू वित्त वर्ष की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार ब्याज दरें अपरिवर्तित रही हैं। इस पर आरबीआई ने कहा कि एमपीसी का यह फैसला मौद्रिक नीति को सोच-विचार के साथ सख्त करने के रुख के अनुरूप है।

आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली छमाही में जीडीपी की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहेगी। वहीं मुद्रास्फीति पर उसका कहना है कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में यह 2.7 से 3.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। बता दें कि दरों से संबंधित यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। वहीं एमपीसी के एक सदस्य रवींद्र एच. ढोलकिया ने मौद्रिक नीति रुख को बदलकर तटस्थ करने के पक्ष में मत दिया था।

आरबीआई ने लिक्विडिटी आउटफ्लो में वृद्धि के लिए एसएलआर (स्टैच्यूरी लिक्विडिटी रेशियो) में 0.25 प्रतिशत की कटौती की। एसएलआर के अंतर्गत वह तय राशि आती है जो बैंकों को आरबीआई के पास रखनी होती है। हालांकि बैंक ने सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो) को अपरिवर्तित रखा है। एमपीसी ने डिजिटल लेनदेन की गति बढ़ाने और निगरानी के लिए एक कानूनी संस्था बनाने का फैसला किया है। अगले साल जनवरी के अंत में इसका नोटिफिकेशन जारी होगा।

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