बेंगलूरु/दक्षिण भारतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौ़डा ने मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उडुपी में की गई चुनावी टिप्पणियों को गंभीरता से लेने से साफ इन्कार कर दिया है। मोदी ने मंगलवार को उडुपी में भाजपा की एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कुछ टिप्पणियां की थीं लेकिन देवेगौ़डा ने इन्हें महत्व देने से इन्कार करने के साथ ही इन्हें सिरे से खारिज कर दिया। वह बुधवार को यहां बेंगलूरु प्रेस क्लब और बेंगलूरु रिपोर्टर्स गिल्ड द्वारा आयोजित ’’पत्रकारों से मिलिए’’ कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। देवेगौ़डा ने कहा कि मोदी अक्सर किसी भी राज्य में चुनाव प्रचार के लिए जाने से पहले अपना होमवर्क काफी अच्छे से किया करते हैं। स्वाभाविक है कि उन्होंने अपने संबोधन में अपना कार्ड काफी अच्छे से खेला है। वहीं, देवेगौ़डा को यह समझ में नहीं आया कि मोदी ने जो कुछ भी कहा, वह सब कहने के लिए उन्हें उडुपी जाने की जरूरत क्यों प़डी?द्यय्ब्रुध् ·र्ैंह् ृद्नर्‍ द्धब्रुत्र ·रु च्ण फ्र्‍क्वद्मष्ठ ·र्ैंर्‍ र्ज्चैंद्यत्रगौरतलब है कि मोदी ने उडुपी में जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौ़डा के प्रति असम्मान जताने का आरोप लगाया था। इसके साथ ही उन्होंने देवेगौ़डा को पूरे देश के एक कद्दावर नेता के रूप में देखा। वहीं, मोदी की इस टिप्पणी के महत्व के बारे में पत्रकारों द्वारा पूछे गए एक प्रश्न का उत्तर देने से इन्कार करते हुए देवेगौ़डा ने कहा कि वह इस मामले में कुछ नहीं कहना चाहते, क्योंकि राहुल गांधी को अभी राजनीति में बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। दूसरी ओर मोदी ने अपने संबोधन में देवेगौ़डा के एक पूर्ववर्ती बयान का भी संदर्भ लिया। पूर्व प्रधानमंत्री ने वर्ष २०१४ के लोकसभा चुनाव से पूर्व एक बयान में कहा था कि अगर भाजपा अपने दम पर चुनाव में बहुमत हासिल कर लेती है तो वह देश छो़डकर चले जाएंगे। इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए मोदी ने उडुपी की जनसभा में कहा था कि देवेगौ़डा चाहें तो वह गुजरात के किसी भी वृद्धाश्रम में रह सकते हैं।उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद जिस समय देवेगौ़डा संसद से अपना इस्तीफा देने जा रहे थे तो मोदी ने उन पर अपना इस्तीफा वापस लेने का दबाव बनाया था। देवेगौ़डा ने कहा कि कर्नाटक को कावेरी नदी से ८ टीएमसी फीट अतिरिक्त पानी देने के साथ ही राज्य से जु़डे कई मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करने के लिए जब भी वह दिल्ली गए तो मोदी ने इन विषयों पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की। सो, अब वह मोदी की चुनावी टिप्पणियों को अधिक महत्व नहीं देना चाहते। ृझ्द्मष्ठ ख्रद्ब झ्द्य द्धब्रुद्बत्र ब्य्यफ्ध् ·र्ैंद्यष्ठख्य् ज्द्मत्रय् ख्रध् (ॅफ्)पत्रकारों द्वारा राज्य विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद किसी पार्टी को बहुमत न मिलने की स्थिति में जनता दल (एस) की रणनीति के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में देवेगौ़डा ने पूरे विश्वास के साथ दावा किया कि उनकी पार्टी निश्चित रूप से अपने दम पर बहुमत हासिल करने जा रही है। उन्होंने अब तक किए गए चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों को कोई मान्यता देने से इन्कार करते हुए कहा कि जमीनी सच्चाई इन सर्वेक्षणों के नतीजों से बिल्कुल अलग है। जनता दल (एस) को पूरे राज्य में मतदाताओं का स्वत:स्फूर्त समर्थन मिल रहा है। इसके अलावा पार्टी ने उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन किया है, जबकि आंध्र प्रदेश की सत्तासीन पार्टी तेलुगू देशम और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की अगुवाई वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति ने कर्नाटक चुनाव में जनता दल (एस) को अपना समर्थन दिया है। जहां दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों को राज्य में आयोजित होने वाली अपनी रैलियों और जनसभाओं में भी़ड जुटाने के लिए ए़डी-चोटी का पसीना बहाना प़ड रहा है, वहीं जनता दल (एस) की सभाओं में लोग बिना दबाव के खुद ही हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष विधानसभा चुनाव को यहां के मतदाताओं ने खुद ही राष्ट्रीय बनाम क्षेत्रीय पार्टियों के मुकाबले का रूप दे दिया है। अब देश में एक स्वस्थ संघीय ढांचा विकसित करने के लिए क्षेत्रीय पार्टियों को आगे ब़ढाने का समय आ गया है। डी. देवराज अर्स, रामकृष्ण हेग़डे और एस बंगारप्पा जैसे राज्य के कई पूर्व मुख्यमंत्री चाहते थे कि कर्नाटक में एक क्षेत्रीय ताकत का उभार हो लेकिन उन्हें इस प्रयास में कामयाबी नहीं मिली। वहीं, देवेगौ़डा ने दावा किया कि वर्ष २०१९ के लोकसभा चुनाव के लिए उन्होंने संगठित तीसरे मोर्चे के विचार को अपना पूरा समर्थन दिया है।

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