दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कमैसूरु। विश्व शान्ति की मंगल कामना को लेकर कृष्णगिरि धाम से निकला रथ बुधवार को यहां पहुंचा। रथ का यहां के समस्त जैन संघांे के प्रतिनिधियों ने जोरदार स्वागत किया। इस रथ में विराजित प्रभु पार्श्वनाथजी की प्रतिमा के व दिव्य कलश के दर्शन किए। इस अवसर पर राजमहल पैलेस से एक भव्य वरघो़डा निकाला गया, जो कि नगर के अशोका रो़ड, महावीर सर्कल, नेहरू सर्कल, कबीर रो़ड होते हुए श्रावक कैलाश चन्द्र बोहरा के निवास स्थान पर सम्पन्न हुआ। सागर समुदाय की विदुषी साध्वीश्री दिव्ययशाश्रीजी, दिव्यदर्शनाश्रीजी के सान्निध्य में निकले इस वरघो़डे में युवा वर्ग ढोल की थाप पर नाच रहे थे तो महिलाएं भी अपने सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए मंगल गीत गाती हुई चल रही थीं। वरघो़डे में संघ के अध्यक्ष कैलाशचन्द बोहरा, अशोककुमार दांतेवाि़डया, प्रवीण लुंक़ड, ललितकुमार गुलेच्छा, सुशील नन्दावत, राजेश बाघमार, सीरवी समाज के मांगीलाल, धनराज, छगनाराम, लखाराम, महेन्द्र सिंह राजपुरोहित, हेमाराम, तुलसाराम, वसनाराम, विमल कुमार, चंदन सिंह सहित ब़डी संख्या में महिलाओं में पिस्ताकुमारी बोहरा, अनीता बोहरा, संतोष कुमारी, डालीबाई, धापूदेवी, संतोष देवी, सुआबाई, चन्द्रा देवी, संतोष कुमारी, राजकुमारी, मनीषा बालियां आदि अनेक श्रद्धालु शामिल रहे। बेंगलूरु संघ के सुरेश बेताला, चंदू गांधी, प्रकाश लो़ढा, महेन्द्र धारीवाल व किशन बोहरा ने भी इसमें भाग लिया। दीपकभाई शाह व कैलाश संकलेचा के मुताबिक इस वरघो़डे में स्थानकवासी जैन युवा संघठन के राजन बाघमार, मनोहर सांखला, राजेन्द्र देसरला, आनंद भंडारी, गौतम पटवा, भारत पटवा, दीपक बोहरा, अभिषेक बाघमार, महावीर धोका व सुरेश बोहरा सहित अनेक कार्यकर्ता साथ रहे। शाह ने बताया कि इस यात्रा में अनेक तीर्थों व साधु-साध्वियों के दिव्य वासक्षेप से भरे मंगलकारी कलश को घर-घर में ले जाने के लिए श्रद्धालुओं में हो़ड मची रही। अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अपने-अपने घर में कलश का पदार्पण करा नमस्कार महामंत्र का जाप कराया। संकलेचा ने बताया कि इससे पूर्व मंगलवार रात्रि को यहां विश्व शांति यात्रा के आगमन पर पार्श्वनाथ वाटिका में सुमतिनाथ जैन नवयुवक संगीत मंडल के तत्वावधान में भक्ति का कार्यक्रम रखा गया। रथ के प्रभारी आनंद सालेचा ने बताया कि दोपहर में रथ शांतिनाथ मन्दिर व शाम को दादावा़डी होते हुए कुंथुनाथ मन्दिर पहुंचा। यहां पर भी अनेक भक्तांे ने रथ के अंदर कृष्णगिरि पीठाधिपति यतिवर्य राष्ट्रसंत डॉ.वसंतविजयजी के द्वारा लाखों मंत्रों से अभिमंत्रित की हुई ५१ इंच की प्रभु श्री पार्श्व की विराजित प्रतिमा व स्वर्ण कलश के दर्शन किये। बकौल सालेचा रात्रि को रथ हासन के लिए प्रस्थान कर गया।

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