चेन्नई। ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी के १२ अधिकारियों ने मंगलवार कोे परम वीर चक्र से सम्मानित मेजर रामास्वामी परमेश्वरम की प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा का अनावरण करना सभी अधिकारियों के लिए काफी यादगार क्षण था क्योंकि जिन अधिकारियों द्वारा इस शहीद की प्रतिमा का अनावरण किया गया उन्होंने इनके साथ ही इस एकेडमी में ४६ वर्ष पहले प्रशिक्षण प्राप्त किया था। उनके साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकारियों ने राष्ट्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले इस शहीद साथी की आदमकद प्रतिमा को एकेडमी को समर्पित करने का निर्णय लिया। लेफ्टिनेंट जनरल राम प्रताप, कर्नल राम कृष्णन ने मेजर रामास्वामी की इस प्रतिमा का अनावरण किया। ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी के लेफ्टिनेंट जनरल राजन रवींद्रन, मेजर रमास्वामी परमेश्वरन के छोटे भाई आर रामनाथन भी इस अवसर पर उपस्थित थे।४६ वर्ष पूर्व १६ जनवरी १९७२ को शॉर्ट सर्विस-१२ के जेंटलमैन कैडेट मेजर रामास्वामी परमेश्वरन ने ओटीए से कमीशन ऑफिसर्स के रूप में अपना अंतिम पद पूरा किया था। मेजर रामसास्वामी परमेश्वरन देश के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित २१ व्यक्तियों में से एक हैं। संयोग से वह ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (ओटीएस) से परम वीर चक्र संयोग सम्मान से सम्मानित होने वाले इकलौते अधिकारी भी हैं। परम वीर चक्र देश में सैन्य पराक्रम दिखाने वाले जवानों को दिया जाने वाला बहादुरी का सर्वोच्च सम्मान है। २५ नवंबर १९८७ को, जब मेजर रामस्वामी परमेश्वरन ऑपरेशन के तहत ऑपरेशन पवन में श्री लंका में खोज अभियान से देर रात से लौट रहे थे तो आतंकवादियों के एक समूह ने उनकी टुक़डी पर हमला कर दिया था।काफी ठंडे दिमाग का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पीछे से उग्रवादियों को घेर लिया और उन पर गोलियों की बौछा़र कर दी। आतंकवादी अचानक हुए इस हमले से हैरान रह गए। हालांकि इसी बीच कुछ आतंकवादी उनके निकट पहुंच गए और हाथापाई में एक आतंकवादी ने उनकी छाती में गोली मार दी लेकिन इसके बावजूद भी मेजर परमेश्वरन ने उस आतंकी के हाथ से राइफल छीनकर उसे मौत की नींद सुला दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद भी वह आदेश जारी करते रहे और जब तक उनकी सांसंे नहीं रुकी तब तक वह अपनी टुक़डी में शामिल जवानों को ल़डाई के लिए प्रेरित करते रहे। इस हमले में मेजर परमेश्वरन की टुक़डी ने पांच आतंकवादियों को मार गिराया और तीन राइफलें तथा दो रॉकेट लांचर बरामद कर लिए। उन्होंने अपनी सांसों को तब तक बचाए रखा जब तक कि सभी आतंकवादी मारे नहीं गए और इसलिए उन्हें परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया।एक वर्ष पहले कर्नल केजी नायर के प्रयासों से त्रिवेन्द्रम में ओटीए के पुराने कैडेटों का पुनर्मिलन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में मेजर परमेश्वरन के पुराने साथ एक साथ मिले और यहीं पर यह निर्णय लिया गया कि उनकी प्रतिमा को ओटीए को समर्पित किया जाएगा। कोर्स के वरिष्ठ अधिकारी के लेफ्टिनेंट जनरल राम प्रताप और कर्नल राम कृष्णन के समन्वय से इस मूर्ति को स्थापित किया गया जोकि इस महान सैनिक की हमेशा याद दिलाती रहेगी। परमेश्वरन के पैरेंट रेजिमेंट, पीवीसी ने मेजर परमेश्वरन की इस प्रतिमा को स्थापित करने के लिए १ लाख रुपए का योगदान दिया है। यह प्रतिमा कांसे से निर्मित है और इसके लंबाई ६ फीट है। इसका स्टैंड २ फीट लंबा और चार फीट चौ़डा है। प्रतिमा का कुल वजन ३०० किलोग्राम है और इसे तंजावूर जिले के कुंभकोणम के रहने वाले मशहूर मूर्तिकार राघवेन्द्रन ने तैयार किया है।

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