चेन्नई। भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा ने शनिवार को कहा कि वकीलों को मामलों के स्थगन की बीमारी से और मामलों की प्रगति में देरी से बचना चाहिए। मद्रास उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक भवन के १२५ वर्ष पूरे होने के मौके पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि समय की पाबंदी कानून व्यवस्था का एक पहलू है। उन्होंने कहा, हम सभी को, पीठ के सदस्यों और सहायक वकीलों को स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि एक न्यायाधीश के तौर पर और मामले में दलील देने के लिए वकील के तौर पर हमारी प्रतिबद्धता होनी चाहिए कि हम तैयारी के साथ आएं। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, अगर कोई वकील देरी करता है, मामले को लटकाता है और कोई न्यायाधीश समय से नहीं बैठे तो दोनों कानून का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी वकील को किसी तरह की बीमारी से ग्रस्त नहीं रहना चाहिए।

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