नई दिल्ली/जयपुर/एजेन्सीराजस्थान के शिव सीट से भाजपा के मौजूदा विधायक मानवेंद्र सिंह १० ब़डे जाट नेताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं्। मानवेंद्र राजस्थान के मारवा़ड क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे हैं्। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राजस्थान के जातीय समीकरणों में यह एक ऐतिहासिक सोशल इंजीनियरिंग की मिसाल होगी। इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में देखने को मिल सकते हैं्। माना जा रहा है कि राजस्थान की १०० विधानसभा सीटों व १८ लोकसभा सीटों पर इस सोशल इंजीनियरिंग का प्रभाव प़ड सकता है। इसके कारण वर्ष २०१८ के विधानसभा और वर्ष २०१९ लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुश्किलें ख़डी हो सकती हैं्। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में राजस्थान के कई ब़डे जाट नेता नारायण राम बे़डा, सुमित्रा सिंह, ऊषा पूनिया, ज्ञानप्रकाश पिलानिया, पूर्व केंद्रीय मंत्री जगदीप धनख़ड, पूर्व सांसद हरिसिंह, सुभाष महरिया, पूर्व विधायक रणवीर पहलवान, जीतराम डूडी सहित कई जाट नेता कांग्रेस में शामिल हुए्। जाट राजपूत समीकरण राजस्थान की राजनीति में पहले भी अपना रंग दिखा चुके हैं्। १९८० के दशक में किसी समय में धुर विरोधी रहे जाट नेता नाथूराम मिर्धा एवं राजपूत नेता कल्याण सिंह कालवी के बीच समन्वय कायम हुआ्।इसका नुकसान कांग्रेस को आज तक भुगतना प़डा है क्योंकि इस समीकरण से पूर्व जाट समुदाय के नेता भाजपा को अछूत मानते थे और ना के बराबर जाट नेता भाजपा के साथ जुडने की आकांक्षा रखते थे। लेकिन इन दो नेताओं के गठजो़ड के कारण काफी संख्या में जाट नेताओं ने कालान्तर में भाजपा की ओर रुख किया। जो दो दशकों में भाजपा के लिए पूर्ण बहुमत में फलीभूत हुआ है। मानवेंद्र सिंह ने बीते २२ सितंबर को बा़डमेर में रैली कर भाजपा छो़डने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि कमल का फूल, हमारी भूल’’ रही। वहीं, उनकी पत्नी चित्रा सिंह ने सरकार को उखा़ड फेंकने का आह्वान किया था। बता दें कि साल २०१४ के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जसवंत सिंह को टिकट नहीं दिया था। इससे उनको निर्दलीय ही चुनाव ल़डना प़डा था। उस चुनाव में जसवंत सिंह हार गए थे। उसी समय से जसवंत सिंह का परिवार भाजपा से नाराज चल रहा था।

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