बेंगलूरु/दक्षिण भारतस्थानीय दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा विद्यारायण्यपुरा में चल रहे देवी वंदन कार्यक्रम के आखिरी दिवस साध्वीश्री रितुभारती जी ने कहा कि इस मानव तन का प्राप्त हो जाना ही माता का बुलावा है। जब एक मनुष्य सत्संग की गंगा में स्नान करता है, तब वह इस रहस्य को जान पाता है। माँ का वास्तविक धाम हमारे हृदय के भीतर ही विद्यमान है। गुरु की कृपा से हम अपने भीतर माँ के ज्योतिस्वरूप के दर्शन पाते हैं और उनका ध्यान करके ही अपने लक्ष्य की ओर ब़ढ पाते हैं। जैसे माता के दर्शनों के लिए हम ऊँचे पर्वत पर च़ढकर जाते हैं, उसी प्रकार ध्यान में भी साधक अपनी चेतना को ऊर्ध्वमुखी करता है। साध्वी निशंका भारती जी ने कहा कि नियमित ध्यान मन को एकाग्र करने के लिए, नकारात्मक विचारों से बचने के लिए और मन को शांत एवं प्रसन्न रखने के लिए उत्तम साधना है।

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