महाराष्ट्र पुलिस ने पेश किए वामपंथी कार्यकर्ताओं के खिलाफ सबूत, कार्रवाई को ठहराया सही

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मुंबई। महाराष्ट्र पुलिस ने माओवादियों के कथित ‘शुभचिंतक’ वामपंथी कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में अहम जानकारी दी है। एडीजी (कानून और व्‍यवस्‍था) परमवीर सिंह ने कहा है कि यह कार्रवाई पर्याप्त सबूतों के आधार पर की गई है। उन्होंने इसे जायज ठहराया है। एडीजी सिंह का कहना है कि पुलिस को छापे में कई अहम सबूत हा​थ लगे हैं। उनका कहना है कि माओवादी कानून-व्यवस्था को ध्वस्त कर सरकार गिराना चाहते थे।

उन्होंने बताया कि छापे के दौरान काफी तादाद में आपत्तिजनक साहित्य बरामद किया गया। एडीजी ने कहा कि पुलिस को जो सबूत मिले हैं, उसके मुताबिक सीपीआई माओवादी कानून व्यवस्था को बिगाड़कर सरकार गिराना चाहते थे। उन्होंने कहा कि छापे की कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी की गई।

एडीजी सिंह ने सुधा भारद्वाज का कथित पत्र भी पढ़ा। यह पत्र कॉमरेड प्रकाश को लिखा गया था। एडीजी ने जानकारी दी कि इस मामले की जांच शुरू हुई थी। बाद में दो नाम और जोड़े, जो सुरेंद्र गाडलिन और रोना विल्सन हैं। गहन जांच के बाद ही पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आगे कार्रवाई की जाए। छापेमारी से मिली सामग्री को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है।

एडीजी ने बताया कि पुलिस के हाथ जो सबूत लगे, उससे यह संकेत मिलता है कि माओवादी बहुत बड़ी साजिश रच रहे थे। उन्होंने कहा कि कवि वरवरा राव, अरुण पेरेरा, गौतम नवलखा, वेरनोन गोन्जाल्विस और सुधा भारद्वाज के माओवादियों से संबंध रहे हैं। पुलिस ने सबूतों के बाद ही इन पर कार्रवाई की है। एडीजी ने कई पत्र प्रस्तुत किए और उक्त लोगों के माओवादियों से कथित संबंधों की बात कही।

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