कहते हैं कि इंसान को अगर कंप्यूटर मान लिया जाए तो ब्रेन उसके लिए हार्डडिस्क है। ब्रेन ही है, जो सभी सचेत और अचेत क्रियाओं को नियंत्रित करता है। हमारा दिमाग ही हमारी भावनाओं, हमारे विचारों, हमारे अहसासों, हमारी भाषा और दुख-दर्द को नियंत्रित करता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में सिर पर चोट लगने के कारण साल में तकरीबन पचास हजार मौतें होती हैं। अगर हम सिर की चोटों के बारे में पूरी तरह जागरूक हों तो निश्चित रूप से इन मौतों की संख्या में कमी की जा सकती है।फ्ैंप्ष्ठख्रद्मप्रय्र्‍ध् ब्स् द्धश्नष्ठद्म डट्टष्ठद्ब ॅ्यद्यद्भय्रॉकलैंड हॉस्पिटल के डायरेक्टर (न्यूरो सर्जरी) डाँ. आशीष श्रीवास्तव कहते हैं, सिर के किसी भी हिस्से में लगी कोई भी चोट खतरनाक होती है, लेकिन ब्रेन स्टेम एरिया ज्यादा संवेदनशील होता है, क्योंकि शरीर की सभी नसों का संपर्क यहीं से होता है। इसलिए ब्रेन स्टेम एरिया को नुकसान होने से मौत तक हो सकती है। ब्रेन स्टेम एरिया की रेटिकुलर एक्टिवेटिंग फॉरमेशन हमारे दिल और रेस्पिरेटरी सिस्टम से जु़डी होती है और यहां चोट लगने या इस हिस्से को नुकसान पहुंचने पर निश्चित रूप से मौत होती है। हालांकि कई बार बिना बाहरी चोट के भी दिमाग में इंजरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बाहर से घाव दिखाई नहीं देता, लेकिन मस्तिष्क को नुकसान हो सकता है।ख्रह् त्रद्यब् ·र्ैंर्‍ घ्ह्ट्टष्ठ्रदिमाग में लगने वाली चोटें दो तरह की होती हैं, गहरी और हल्की। हल्की चोट में आप होश में रहते हैं। दिमाग की हड्डियों में हल्का-फुल्का क्रैक तो हो सकता है। सिर में इस तरह की हल्की चोट मस्तिष्क को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती, फिर भी इसका असर एकदम या कुछ समय बाद हो सकता है।दिमाग में लगने वाली गहरी चोट किसी दुर्घटना, खेलते समय या झग़डे के दौरान लग सकती है। इसमें सिर से खून आना, मस्तिष्क में खून के थक्के जमा होना और मस्तिष्क में फ्रैक्चर हो सकता है। मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है तथा गर्दन में झटका लगने, सिर पर झटके से मार के कारण गहरी चोटें आ सकती हैं।

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