नई दिल्ली/भाषाअगर आप सूट बनवाने के दौरान दर्जी को एक यो दो बार नाप देने में खीझ जाते हैं तो आपके लिए यह जानना दिलचस्प होगा कि मैडम तुसाद के संग्रहालय में अगर आपका पुतला लगाना हो तो विशेषज्ञों की एक टीम तकरीबन आपके २०० नाप लेगी। दिल्ली के ८४ साल पुराने जिस रीगल थिएटर में कभी अमिताभ बच्चन की चलती फिरती फिल्में दिखाई जाती थीं, वहां आज मैडम तुसाद का विशवप्रसिद्ध वैक्स संग्रहालय है, जहां बहुत से पुतलों के बीच सदी के महानायक का खामोश बुत भी ख़डा है। दरअसल जब भारत में तुसाद संग्रहालय बनाने की बात चली तो दिल्ली के साथ साथ मुंबई के बारे में भी विचार किया गया, लेकिन इत्तेफाकन इसी बीच दिल्ली के कनाट प्लेस का रीगल सिनेमा बंद हो गया और यह स्थान संग्रहालय के लिए एकदम मुफीद लगी। मैडम तुसाद वैक्स संग्रहालय का संचालन करने वाली ब्रिटेन की मर्लिन इंटरटेनमेंट के एक महाप्रबंधक अंशुल जैन ने यह तमाम जानकारी दी। ‘अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस’’ पर जैन ने ‘भाषा’’ को बताया कि दिल्ली में बनाया गया यह संग्रहालय मैडम तुसाद संग्रहालय की श्रृंखला की २३वीं क़डी है। शुरू में इसमें मोम के ४३ बुत लगाए गए थेख, जो अब ५० हो गए हैं। संग्रहालय में कुल ५० बुत लगाए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक प्रतिकृति को बनाने में डे़ढ से ढाई करो़ड रूपये का खर्च आता है। इसे विशेषज्ञ मेकअप आर्टिस्ट सहित २० से अधिक कलाकार बनाते हैं। एक प्रतिकृति को तैयार करने में करीब ६ महीने का वक्त लगता है। उन्होंने बताया कि जल्द ही दिल्ली के वैक्स म्यूजियम में क्रिकेटर विराट कोहली और फिल्म अदाकारा सनी लियोन के बुत भी लगाए जाएंगे। कोहली को हूबहू मोम में ढालने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम लंदन से आयी और उनके २०० माप लिये गये। नई दिल्ली के मैडम तुसाद में नेहरू, ध्यानचंद, टैगोर की प्रतिकृति नहीं होने के बारे में उन्होंने बताया कि हर साल नई प्रतिकृतियों को अन्य संग्रहालयों से बदला जाता है जिससे नयापन बना रहे। यह बदलाव विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की मांग के आधार पर किया जाता है। कुछ ही महीने पहले सिंगापुर के मैडम तुसाद संग्रहालय में अनिल कपूर का बुत भेजा गया है। गौरतलब है कि मैडम तुसाद का सबसे ब़डा और प्रमुख संग्रहालय लंदन में है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की दिल जला देने वाली गर्मी का असर इन पुतलों पर न हो, इसके लिए वैक्स म्यूजियम में निश्चित तापमान बनाए रखा जाता है। संग्रहालय का तापमान ब़ढ न जाए इसलिए एक वक्त में यहां ५०० लोग ही अंदर रह सकते हैं। इससे अधिक लोग होने पर प्रतिकृति को नुकसान पहुंच सकता है। इसके रखरखाव के लिए विशेषज्ञों की एक अलग टीम है। उन्होंने बताया कि संग्रहालय में जिन लोगों के बुत लगाए गए हैं उनके बारे में संपूर्ण जानकारी भी दर्शकों को दी जाती है। जैन ने कहा, संग्रहालय में पुतलों की संख्या सीमित है क्योंकि कनाट प्लेस की रीगल बिल्डिंग धरोहर इमारत है और इसमें फेरबदल करने के लिए कई तरह की स्वीकृतियों की जरूरत होती है। हम कोशिश कर रहे हैं और लोगों को जल्द ही कुछ और लोगों के बुत देखने को मिलें।

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