कोयंबटूर। राज्य सरकार द्वारा राज्य में भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन करने का नियम लागू कर दिया गया है। सरकार के इस निर्णय के कारण विभिन्न तालुक कार्यालयों और राजस्व कार्यालयोंे में भूमि पंजीकरण की संख्या घट गई है। सरकार के इस निर्णय से भू- दस्तावेज लेखकर नाराज है और उन्होंने सोमवार से ह़डताल पर जाने की घोषणा की है। इन लेखकों ने सरकार से मांग की है कि इस योजना में तुरंत बदलाव किया जाए।जिले में लगभग ५००० भू-दस्तावेज लेखक हैं और यहां के १७ सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में जमीन पंजीकरण करवाने के लिए आने वाले लोगों के जमीन की बिक्री और खरीद से संबंधित दस्तावेजों को तैयार करने का कार्य करते हैं। सरकार द्वारा भूमि पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध होने से अब इन दस्तावेज लेखकों के पास आने वाले लोगों की संख्या कम हो गई है। विभिन्न पंजीकरण कार्यालयों में कार्य करने वाले भू-दस्तावेज लेखकों में से कई ऐसे हैं जिन्हें कंप्यूटर का ज्ञान नहीं है। इसके साथ ही शुरुआती चरण में कंप्यूटर स्लो होने के कारण एक दस्तावेज को अपलोड करने में लगभग घंटे भर का समय लग जाता है।इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि भू- दस्तावेज लेखकों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। जमीन पंजीकृत करवाने का कोई भी इच्छुक व्यक्ति अपने निकटतम ब्राउजिंग सेंटर में जाकर अपने जमीन का दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। भू दस्तावेज लेखकों का आरोप है कि पहले जमीन पंजीकरण के लिए सरकार की ओर से जो सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाया गया था उसमें भू-दस्तावेज लेखकों के लिए लॉग इन का विकल्प अलग से उपलब्ध करवाया गया था हालांकि हाल ही में सभी पंजीकरण कार्यालयों में नए सॉफ्टवेयर उपलब्ध करवाए गए हैं जिनमें भू-दस्तावेज लेखकों के लॉग इन का कोई विकल्प नहीं है।उल्लेखनीय है कि आम तौर पर कोयंबटूर, तिरुपुर, ईरोड, गोबीचेट्टीपाल्यम और निलगिरी जिले स्थित भू पंजीकरण कार्यालयों में आम तौर पर प्रतिदिन १००० जमीनों का पंजीकरण होता है लेकिन जब से ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया लागू की गई है मात्र ७७४ दस्तावेज ही पंजीकृत हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि नई प्रक्रिया का परीक्षण पिछले वर्ष जून से ही शुरु हो गया था और जितने भी भू-दस्तावेज लेखक हैं उन्हें विभाग की ओर से नई प्रक्रिया के बारे में समुचित प्रशिक्षण दिया गया था। इसके साथ ही पंजीकरण विभाग के उप महानिरीक्षक कार्यालय में इसके लिए प्रशिक्षण देने की एक स्थायी सुविधा भी उपलब्ध है।

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