muni shri pravachan
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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शहर के यशवंतपुर तेरापंथ सभा के तत्वावधान में तेरापंथ भवन में चातुर्मासार्थ विराजित मुनिश्री रणजीतकुमारजी व रमेशकुमारजी के सान्निध्य में मंगलवार को अध्यात्म सप्ताह अंतर्गत ‘प्रेक्षा स्वयं द्वारा स्वयं की’ विषय पर प्रेरक प्रवचन देते हुए मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने कहा कि स्वयं द्वारा स्वयं को देखना कठिन है। यदि सत्य को प्राप्त करना है तो स्वदर्शन की राह पर चलना होगा।

उन्होंने कहा, सत्य का साक्षात्कार तभी होता है जब स्वदर्शन का अभ्यास करें। जब तक हम स्वयं द्वारा स्वयं की प्रेक्षा नहीं करेंगे तब तक स्वदर्शन संभव नहीं है। मुनि रमेशकुमारजी ने कहा कि आत्मा द्वारा आत्मा को देखें। इससे हम अध्यात्म की साधना में गतिमान हो सकते हैं। खुली आंखें दूसरों को देखती हैं। हम आंख बंद करके स्वयं को देखना सीखें।

उन्होंने कहा, अपने आप को देखने की प्रवृत्ति स्वयं को बढ़ाती है। हमारा आकर्षण आत्मगुणों के विकास की ओर हो तभी साधना द्वारा शाश्वत सुख के स्त्रोत को खोजा जा सकता है। भीतर प्रवेश करने का उपाय है प्रेक्षाध्यान। प्रेक्षाध्यान की साधना से हम अध्यात्म के रहस्यों का साक्षात्कार कर सकते हैं।

इस मौके पर अभातेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कटारिया ने संतों के दर्शन किए। तेरापंथ सभा यशवंतपुर के संगठन मंत्री महावीर ओस्तवाल ने कटारिया का स्वागत किया। विमल कटारिया ने कहा कि आने वाले वर्ष में आचार्यश्री का बेंगलूरु में आगमन हो जाएगा। उससे पूर्व हमारी जिम्मेदारी है कि हम और अधिक संगठित होकर आचार्यश्री के प्रवास को सफल बनाएं।

तेरापंथ सभा के अध्यक्ष प्रकाश बाबेल, हॉस्टल प्रभारी राजेश चावत, किशोर मंडल प्रभारी विशाल पितलिया, तेरापंथ महासभा के सदस्य कैलाश बोराणा, तेयुप के संगठन मंत्री विनोद मुथा, सभा के मंत्री गौतम मूथा, उपाध्यक्ष ताराचंद गन्ना, सहमंत्री सुरेंद्र सेठिया आदि उपस्थित थे।

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