चेन्नई। अग्नि ५ मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को यहां कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल के लिए मुख्य सामग्रियां मुहैया कराकर तमिलनाडु के उद्योग ने महत्वपूर्ण योगदान दिए है। इससे पहले आज दिन में भारत ने ओडिशा के तट के पास सतह से सतह पर मार करने में सक्षम परमाणु क्षमता वाले बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-५ का सफल परीक्षण किया जो ५,००० किलोमीटर की दूरी तक मार करने की क्षमता वाली अग्नि श्रृंखला की सबसे उन्नत मिसाइल है। शहर के रोयापेटा स्थित कलैवनार अरंगम में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य के मुख्यमंत्री ईडाप्पाडी के पलानीस्वामी, रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रमों के प्रबंध निदेशक और आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन सहित केन्द्र सरकार ओर राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।ृ्यज्ज्द्म झ्य्ैंघ् ·र्ैंर्‍ फ्र्ड्डैंध्त्रय् द्बष्ठ्र ठ्ठर्‍ृय्द्यठ्ठर्‍ृय्ष्ठ ·र्ैंय् द्भह्ख्ख्रय्द्मरक्षा मंत्री ने दो दिन की रक्षा उद्योग विकास बैठक में अपने संबोधन में तालियों की ग़डग़डाहट के बीच कहा, अग्नि-५ के लिए मुख्य सामग्रियां तमिलनाडु से मिलीं। उन्होंने कहा, अगर हम आज अग्नि-५ के परीक्षण में सफल हुए हैं तो ऐसा ना केवल आयातित पुर्जों के कारण हुआ बल्कि डीआरडीओ (रक्षा अनुसंधान विकास संगठन) की अनुसंधान गतिविधियों के कारण भी हुआ। इन पुर्जों को सफलतापूर्वक जो़डा गया और आज एक सफल परीक्षण हुआ। निर्मला ने कहा कि तमिलनाडु ने निवेश के लिए एक सकारात्मक माहौल मुहैया कराया जिसका इस्तेमाल देश में रक्षा क्षेत्र के विकास के लिए किया जा सकता है।ृझ्श्नस्ध् द्बष्ठ्र ब्ह्ख्र्‍ झ्ब्ध्र्‍ द्यूय्य् झ्श्नख्रप्रय्श्चद्मर्‍अप्रैल में पहली रक्षा प्रदर्शनी की मेजबानी करेगा। प्रदर्शनी ११ से १४ अप्रैल तक लगेगी और इसमें करीब ८० देशों के भाग लेने की संभावना है। उन्होंने यहां दो दिवसीय रक्षा उद्योग विकास बैठक को संबोधित करते हुए कहा, एक्सपो को लेकर कई सवाल आए हैं। इनमें से एक सवाल है कि इसमें देरी क्यों हुई। उन्होंने कहा कि मैं कहना चाहती हूं कि कोई देरी नहीं हुई है। बीते वर्ष सितंबर में कैबिनेट में फेरबदल के बाद रक्षा मंत्रालय ने इसके आयोजन की आवश्यक प्रक्रिया शुरू की। रक्षा मंत्री ने कहा कि मंत्रालय के अधिकारियों ने इससे पहले इस कार्यक्रम को लेकर कई राज्यों का दौरा किया था और तमिलनाडु सरकार तुरंत आगे बढकर आई और उसने इसके लिए महाबलीपुरम के पास ईस्ट कोस्ट रोड पर जमीन आवंटित कर दी।च्णह्ट्टष्ठ र्श्रह्ख्ह्र ·र्ैंह् द्धढ्ढणय्प्य् ्यख्रद्भय् ज्य्ॅख्य्उन्होंने कहा, आमतौर पर कार्यक्रम फरवरी के अंत तक होता है। मंत्रालय में कुछ बदलावों के कारण हमने इसे अप्रैल में करने का फैसला लिया। उन्होंनक कहा कि हमें जमीन उपलब्ध कराके हमारी मदद करने पर मैं तमिलनाडु सरकार कीे आभारी हूं। उन्होंने ने कहा कि नौसेना, थलसेना और वायुसेना के लिए प्रदर्शनी में अपने उपकरण दिखाने के लिए व्यवस्थाएं की जाएंगी। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों को बढावा देने के प्रयास में, उन्हें प्रदर्शनी में स्टाल लगाने के लिए भारी छूट का प्रस्ताव है। दो दिवसीय बैठक के संबंध में, निर्मला ने रक्षा फर्मों से अवसर का फायदा उठाने की अपील की क्योंकि मंत्रालय के अधिकारी किसी भी सहायता के लिए उपलब्ध हैं।फ्द्यध्र्‍·र्ल्ैंत्र द्बष्ठ·र्ैं-ट्टरू झ्श्न्य·र्श्नैंद्भय् ज्य्द्यर्‍ ·र्ैंर्‍रक्षा मंत्री ने सरलीकृत ’’मेक-टू’’ प्रक्रिया जारी की जिसमें स्टार्ट-अप के लिए सरल पात्रता मानदंड, न्यूनतम दस्तावेज, व्यक्तियों और उद्योगों से स्वत: संज्ञान प्रस्तावों के प्रावधान हैं। इस नई पक्रिया के आने से स्टार्ट अप शुरु करने वाले उद्यमियों को आसानी होगी। प्रोटोटाइप के सफल विकास के लिए इस प्रक्रिया की परिकल्पना की गई है। रक्षा मंत्री ने रक्षा उत्पादन विभाग द्वारा स्थापित डिफेंस इन्वेस्टर सेल की स्थापना करने की भी घोषणा की जिससे रक्षा उत्पादन क्षेत्र में निवेश की सुविधा होगी। रक्षा निवेशक सेल डिफेंस सीधे संभावित निवेश के संबंध में सभी इच्छुक निवेशकों और नीति से संबंधित प्रश्नों का उत्तर देगा और रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित परियोजनाओं के लिए इच्छुक आवेदक संपर्क कर सकेंगे।फ्ष्ठद्मय् ·र्ष्ठैं त्रर्‍द्मह्र ृैंख् ध्ष्ठ द्यब्ष्ठ ब्स्र ्यब्डफ्य्ज्ञातव्य है इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में १००० से अधिक विक्रेता हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय थल सेना, भारतीय नौसेना और भारतीय वायु सेना स्वदेशीकरण के लिए विशेषकर लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां(एमएसएमई) से संबंधित अपनी आवश्यकताओं को पेश कर रही है। इस अवसर पर लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय द्वारा देश में लघु उद्योगों की मदद करने के लिए तैयार की गई नीतियों को भी सामने रखा गया। इसके साथ ही औद्योगिक नीति एवं प्रचार विभाग ने देश में व्यापार को आसान करने के लिए सरकार द्वारा शुरु किए गए पहलों के बारे में बताया और रक्षा उत्पादों के निर्माण के लिए लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के बारे में बताया। रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि रक्षा उत्पादों के निर्माण में मेक इन इंडिया की परिकल्पना को लागू करने का आश्वासन दिया।

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