नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को राजीव गांधी हत्याकांड के एक दोषी द्वारा उठाए गए सवालों को गंभीर और बहस योग्य बताया। शीर्ष अदालत ने उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखने के मई १९९९ के उसके आदेश को वापस लेने के अनुरोध वाली याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी करके उससे दोषी एजी पेरारिवलन के आवेदन पर तीन हफ्ते में जवाब देने को कहा। पेरारिवलन को इस मामले में पहले मौत की सजा दी गई थी जिसे बाद में उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया। उसने शीर्ष अदालत के मई १९९९ के उस आदेश को वापस लेने का अनुरोध किया था जिसमें उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया था। दोषी का कहना है कि उसे साजिश की जानकारी नहीं थी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने कहा कि वह इस अर्जी पर २१ फरवरी को आगे विचार करेगी। पीठ ने संकेत दिये कि वह इस मामले को ब़डी पीठ के पास भेज सकती है। पेरारिवलन ने अपनी अर्जी में सीबीआई के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक वी. त्यागराजन के हलफनामे का हवाला दिया जिन्होंने टाडा के तहत उसका इकबालिया बयान दर्ज किया था। अर्जी में कहा गया है कि जांच ब्यूरो के पूर्व अधिकारी ने अपने हलफनामे में कहा था कि पेरारिवलन ने अपने इकबालिया बयान में स्पष्ट रूप से कहा था कि दो बैट्रियां खरीदते समय उसे इस बात का कोई आभास नहीं था कि इनका इस्तेमाल किस काम में होगा। शीर्ष अदालत ने मई १९९९ को अपने फैसले में पूर्व प्रधान मंत्री राजीव गांधी की हत्या के अपराध में चार दोषियों-पेरारिवलन, मुरूगन, संतम और नलिनी की मौत की सजा बरकरार रखी थी।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY