नई दिल्ली। भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी राष्ट्रहित और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं सह पाते। इन मसलों पर उनका नजरिया बिल्कुल स्पष्ट रहा है। देशहित के जिन सरकारी निर्णयों पर कई बार दूसरे आलोचक चुप्पी साध लेते हैं, उन पर स्वामी बेबाक टिप्पणी करते हैं। ऐसा ही मामला फिर से सामने आया है। इस बार स्वामी ने रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के एक निर्णय की आलोचना अपने ट्वीट के जरिए की है। रक्षा मंत्रालय की पूंजीगत परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्री की जो सलाहकार समिति (आरएमसीओएमपी) गठित की गई है, उसमें अर्न्स्ट एंड यंग के विशेष सलाहकार आर आनंद और केपीएमजी के अंबर दुबे को शामिल किया जाना स्वामी के गले नहीं उतर रहा है। उन्होंने रक्षा मंत्री सीतारमण के इस निर्णय को ’देश की सुरक्षा के लिए त्रासदी’ करार दिया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष रक्षा उत्पादों के मामले में मेक इन इंडिया मिशन के तहत निजी कंपनियों को केंद्र सरकार द्वारा प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया गया था। उस दौरान जिन कंपनियों को रक्षा क्षेत्र में लाने के लिए आमंत्रित करने की योजना बनी थी, उन कंपनियों का भी सुब्रह्मण्यम स्वामी ने विरोध किया था। उनका कहना था कि किसी भी कंपनी की क्षमता के आकलन से पहले उसकी विश्‍वसनीयता का आकलन करना जरूरी है। स्वाभाविक रूप से वैश्‍विक रेटिंग एजेंसी अर्न्स्ट एंड यंग और बाजार सर्वेक्षण कंपनी केपीएमजी के पदाधिकारियों को रक्षा मंत्री की सलाहकार समिति का हिस्सा बनाए जाने पर स्वामी ने दोबारा प्रश्न उठाया है। उनका सवाल बिल्कुल सधा हुआ और विभिन्न राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर उनके पिछले नजरियों पर फिट बैठने वाला प्रश्‍न मालूम होता है। रक्षा के मुद्दे पर किसी भी उच्च स्तरीय समिति में निजी कंपनियों के लोगों को किसी भी प्रकार की भूमिका देने से पहले देश को यह विश्वास दिलाने की जरूरत है कि इनसे देश की रक्षा को किसी नुकसान की आशंका नहीं है।

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