लखनऊ। अयोध्या के कारसेवकपुरम में बुधवार को रामराज्य रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। यह रामराज्य यात्रा कई राज्यों से होकर रामेश्‍वरम तक जाएगी। इस दौरान बाबर के वंशज और हैदराबाद के प्रिंस याकूब हबीबुब्दीन तुसी ने कहा कि मुगलकाल के बादशाहों और उनके कारिंदों ने जो गलतियां की हैं, उनके लिए वह माफी मांगते हैं। उन्होंने कहा कि वह सुन्नी सेन्ट्रल फोरम और विश्‍व हिंदू परिषद एक साथ मिलकर भव्य राम मंदिर का निर्माण करेंगे। यात्रा के शुभारंभ के मौके पर मौजूद मुख्य अतिथि विश्‍व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महासचिव चम्पत राय ने कहा कि वर्ष 1991 में भारत सरकार ने मामले को आपसी सुलह से सुलझाने के लिए कदम उठाया था। राय ने कहा कि इसमें मुस्लिम पक्ष के नेताओं ने कहा था कि अगर विवादित स्थल पर मस्जिद के चिन्ह साबित नहीं हुए तो वह अपना दावा छोड़ देंगे। हाई कोर्ट ने फैसला दे दिया कि वहां मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर के ही पुरावशेष मिले हैं तो उन्हें अपना दावा छोड़कर राम मंदिर के लिए सहयोग देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अब सभी मुस्लिम समुदाय के लोग राम मंदिर निर्माण के पक्ष में खुलकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग है कि राम मंदिर के मामले में सुप्रीम कोर्ट जल्द फैसला सुनाए। इसी क्रम में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से निकाले जाने के बाद मंदिर-मस्जिद विवाद को सुलझाने का फार्मूला देने वाले मौलाना सलमान नदवी एक सवाल का जवाब देते हुए फूट कर रो पड़े। वह मशहूर इस्लामी यूनिवर्सिटी नदवतुल उलेमा में कक्षा लेने पहुंचे थे। छात्रों ने उनसे बाबरी मस्जिद की जमीन मंदिर के लिए देने के मुद्दे पर एक सवाल पूछा लिया जिसका जवाब देते हुए मौलाना सलमान नदवी भावुक होकर रोने लगे।
नदवी कॉलेज में छात्रों को बता रहे थे कि वह किन शर्तों पर राम मंदिर-मस्जिद विवाद के समझौते के लिए तैयार हुए। उन्होंने कहा, मुझे बदनाम किया जा रहा है, अल्लाह इनसे निपटेगा।’ ज्ञातव्य है कि हाल ही में मौलाना सलमान नदवी ने श्री श्री रविशंकर से मुलाकात में विवादित जमीन पर राम मंदिर बनाने और मस्जिद को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फार्मूला दिया था, जिसके बाद उन्हें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। सलमान नदवी से नाराज मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मौलाना सलमान हुसैनी नदवी और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) में दरार डालने के लिए नदवी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मंदिर के लिए बाबरी मस्जिद की जमीन छोड़ देने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने का भी आह्वान किया।

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