मुंबई। खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य लागत से डे़ढ गुना करने के बारे में बजट में की गई घोषणा से महंगाई ब़ढने और इक्विटी निवेश में एक लाख रुपए से अधिक के दीर्घावधि पूंजीगत लाभ पर १० प्रतिशत कर लागू किए जाने से सहमे निवेशकों ने शुक्रवार को जमकर बिकवाली की जिससे घरेलू शेयर बाजार धराशाई हो गया। चौतरफा बिकवाली के दबाव में बीएसई के सेंसेक्स में २४ अगस्त २०१५ (१६२४.५१ अंक) के बाद की सबसे ब़डी गिरावट रही। यह २.३६ फीसदी यानी ८३९.९१ अंक लु़ढककर ३५,०६६.७५ अंक पर बंद हुआ। एनएसई का निफ्टी भी २.३३ फीसदी यानी २५६.३० अंक खोता हुआ १०,७६०.६० अंक पर बंद हुआ। यह इसकी भी २४ अगस्त २०१५ (४९०.९५ अंक) के बाद की सबसे ब़डी गिरावट है। निवेशक इस बात को लेकर आशंकित हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य के संबंध में की गई घोषणा से खुदरा कीमतों पर काफी प्रभाव प़डेगा। खुदरा महंगाई दर पहले ही १७ माह के उच्चतम स्तर ५.२१ प्रतिशत पर है। ऐसे में रिजर्व बैंक ब्याज दर के संबंध में आगामी ०६ और ०७ फरवरी को होने वाली नीतिगत समीक्षा बैठक में दर ब़ढाने पर भी विचार कर सकता है। रिजर्व बैंक ने खुदरा महंगाई दर के चार प्रतिशत रहने का लक्ष्य निर्धारित किया था।बजट को लेकर शेयर बाजार में आए सुनामी से निवेशकों को शुक्रवार को एक ही दिन में ४,५८,५८१.११ करो़ड रुपए की चपत लगी। चौतरफा बिकवाली के कारण मात्र एक दिन में बीएसई का बाजार पूंजीकरण १,५३,१३,०३३.३८ करो़ड रुपए से घटकर १,४८,५४,४५२.२७ करो़ड रुपए रह गया। डॉलर की तुलना में रुपए के कमजोर होने तथा वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख का भी शेयर बाजार पर असर प़डा।

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