श्रीनगर। सुरक्षाबलों के पैलेट गन के हमले से १४ साल की उम्र में अपनी आंखें गंवाने वाली इंशा मुश्ताक को ब़डी कामयाबी मिली है। यह उसकी लगातार मेहनत का नतीजा ही है कि जम्मू कश्मीर बोर्ड के तहत दसवीं की परीक्षा में वह पास हो गई लेकिन एक क्लेरिकल गलती की वजह से उसके अंकों का कुल योग कम रह गया।दरअसल जम्मू कश्मीर बोर्ड के दसवीं के परिणाम मंगलवार को घोषित किए गए जिसमें कश्मीर के शोपियां जिले के एक सुदूर गांव की रहने वाली इंशा ने ४३ हजार स्टूडेंट्स के साथ यह परीक्षा उत्तीर्ण की। इंशा २०१६ ग्रीष्मकालीन प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों के पैलेट गन का शिकार हो गई थीं। इंशा उस वक्त अपने घर की खि़डकी से प्रदर्शनकारियों को देख रही थी तभी पैलेट गन की फायरिंग ने उसकी आंखों को हमेशा के लिए खराब कर दिया। पैलेट की वजह से इंशा की आंखों का रेटिना और ऑप्टिक नर्व नष्ट हो गया था। इसके बाद राज्य के टॉप आइ केयर अस्पताल में इलाज के बाद भी उसकी आंखें ठीक नहीं हो पाईं। बोर्ड एग्जाम रिजल्ट से इंशा खुश है लेकिन क्लेरिकल एरर के चलते वह थो़डी निराश भी है। उसने बताया, परिणाम में मुझे गणित के विषय में फेल बताया गया है जबकि यह मेरा चुना हुआ सब्जेक्ट नहीं था। इंशा ने बताया कि आंखों की दृष्टि चले की वजह से उसने संगीत विषय से प़ढाई की थी। इंशा अब गायन में पारंगता हासिल कर रही है। उसकी कामयाबी पर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्विटर पर बधाई दी है।

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