नई दिल्ली। सरकार ने पासपोर्ट में आखिरी पृष्ठ नहीं छापे जाने और ’’उत्प्रवासन जांच आवश्यक’’ श्रेणी वाले पासपोर्ट को नारंगी रंग के कवर में जारी करने के अपने फैसलों को वापस ले लिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को यहां एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। विज्ञप्ति के अनुसार, मंत्रालय को १२ जनवरी के पासपोर्ट संबंधी इन दोनों फैसलों को लेकर अनेक व्यक्तियों और संगठनों की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुए हैं जिनमें पासपोर्ट में इन बदलावों के फैसलों पर पुनर्विचार का आग्रह किया गया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोमवार को विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह की उपस्थिति में एक बैठक में दोनों फैसलों पर गहनता से एक बार फिर विचार किया। विभिन्न पक्षों से व्यापक बातचीत के बाद विदेश मंत्रालय ने फैसला किया कि आखिरी पृष्ठ के प्रकाशन की पुरानी परिपाटी जारी रहेगी और ’’उत्प्रवासन जांच आवश्यक’’ श्रेणी वाले पासपोर्ट को नारंगी रंग के कवर में नहीं जारी किया जाएगा। ये दोनों निर्णय विदेश मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय समिति की सिफारिशों के आधार पर लिए गए थे। उक्त समिति पासपोर्ट आवेदनों में उन मुद्दों के समाधान खोजने के लिए गठित की गई थी जिनमें मां और बच्चे ने इस बात पर जोर दिया था कि पिता का नाम पासपोर्ट में नहीं लिखा जाना चाहिए। समिति को एकल अभिभावक या गोद ली गई संतान केे मुद्दों का भी हल खोजने को कहा गया था।समिति की एक सिफारिश यह भी थी कि पासपोर्ट की बुकलेट में पिता या वैध अभिभावक, मां, पत्नी के नाम और पता आदि की सूचनाएं प्रकाशित करने की बाध्यता से मुक्त होने की संभावना तलाशी जाएं। विदेश मंत्रालय ने १२ जनवरी को कहा था कि उसने अंतर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन की दिशानिर्देशों और विभिन्न साझीदारों से बातचीत के माध्यम से निर्णय किया कि पासपोर्ट अधिनियम १९६७ और पासपोर्ट नियम १९८० के अंतर्गत पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेज में अंतिम पृष्ठ नहीं छापा जाएगा जिस पर माता, पिता, पत्नी का नाम, पता, आव्रजन जांच आवश्यक, पुराना पासपोर्ट नंबर, जारी होने की तिथि एवं स्थान अंकित किया जाता है।

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