अहमदाबाद/एजेन्सी नरोदा पाटिया दंगे के मामले में गुजरात उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री माया कोडनानी को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया है।उच्च न्यायालय ने कोडनानी समेत १७ लोगों को बरी कर दिया है। उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि माया कोडनानी की वारदात वाली जगह पर मौजूदगी साबित नहीं हुई है। हालांकि बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी को दोषी करार देते हुए उच्च न्यायालय ने २१ साल जेल की सजा सुनाई है। इससे पहले निचली अदालत ने बजरंगी को मौत तक जेल में रहने की सजा दी थी। इस तरह इस फैसले से बाबू बजरंगी को भी थो़डी राहत मिली है। एसआईटी कोर्ट ने बाबू बजरंगी को मृत्युपर्यंत आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बजरंगी के अलावा हरीश छारा और सुरेश लांग़डा समेत अदालत ने १२ आरोपियों की सजा को बरकरार रखा है। इन सभी को २१ साल जेल की सजा सुनाई गई है। २ अन्य लोगों पर फैसला आना अभी बाकी है, जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है। उच्च न्यायालय ने दंगा पीि़डतों की मुआवजे की मांग को भी खारिज कर दिया है। जस्टिस हर्षा देवानी और जस्टिस ए. एस. सुपेहिया की पीठ ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद पिछले साल अगस्त में फैसला सुरक्षित रख लिया था। अगस्त २०१२ में एसआईटी की विशेष अदालत ने राज्य की पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता माया कोडनानी समेत ३२ लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोडनानी को २८ साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद कोडनानी और बजरंग दल के नेता बाबू बजरंगी समेत सभी आरोपियों ने हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। झ्ष्ठप्रय्ष्ठ फ्ष्ठ र्‍ द्यह्ख् ्यप्प्रय्ष्ठप्तख़्य् ब्स्र द्बय्द्भय् ·र्ैंह्ठ्ठद्मय्द्मर्‍पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञ रहीं माया कोडनानी को दंगे के मामले में २००९ में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त, २०१२ में विशेष एसआईटी अदालत ने उन्हें दोषी करार देते हुए २८ साल की आजीवन कैद की सजा सुनाई थी। हालांकि २०१४ में स्वास्थ्य खराब होने के आधार पर उन्हें जमानत मिल गई थी। वह इन दिनों लोप्रोफाइल जिंदगी जी रही हैं और राजनीतिक गतिविधियों से दूर हैं।

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