लखनऊ। अक्सर अपने अजीबोगरीब फतवों के लिए सुर्खियों में रहने वाला प्रदेश के देवबंद के उलेमाओं का एक और फतवा इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। गाजियाबाद के एक व्यक्ति द्वारा जीवन बीमा के बारे में पूछ गए प्रश्‍न पर यह फतवा जीवन बीमा के संबंध में जारी किया गया है। फतवे में जीवन बीमा की पॉलिसी खरीदने को इस्लाम में हराम बताया गया है। उलेमाओं ने इसके पीछे यह तर्क दिया है कि जीना-मरना अल्लाह के हाथ में है। ऐसे में कोई बीमा कंपनी व्यक्ति की लंबी जिंदगी की गारंटी नहीं दे सकती है। फतवे में मुस्लिमों को जीवन बीमा से दूर रहने की नसीहत दी गई है। इस फतवे को लेकर मुस्लिम समाज की क्या प्रतिक्रिया होती है इस पर लोगों की नजरें टिकी हैं। इसी क्रम में सोशल मीडिया पर विषय चर्चा में है। देवबंद के मौलानाओं ने कहा है कि बीमा कंपनियां पॉलिसी खरीदने वाले लोगों के प्रीमियम के पैसे को अलग-अलग ढंग से निवेश करती हैं और इस पैसे पर ब्याज अर्जित करती है। कंपनियों द्वारा ग्राहकों को ब्याज का पैसा ही लौटाया जाता है। जबकि ब्याज के जरिए अर्जित किसी भी आय को इस्लाम में हराम माना गया है।
देवबंद के वरिष्ठ मौलाना नजीफ अहमद ने इस संबंध में कहा, ‘यह फतवा इस्लामिक शरियत की रौशनी में जारी किया गया है। मुस्लिमों को बताया गया है कि वह सिर्फ अल्लाह में एतबार रखें, सिर्फ खुदा ही सबसे बड़ी सत्ता हैं, उन्हीं के हाथ में जीवन और मौत है। लिहाजा किसी बीमा कंपनी के चक्कर में न पड़ें।’ उल्लेखनीय है कि यह वर्ष शुरु होने के बाद से ही देवबंद उलेमाओं द्वारा कई फतवे जारी किए गए हैं। हाल में देवबंद उलेमाओं ने एक फतवा जारी कर डिजाइऩर बुरका को हराम करार दिया था।
फतवे में कहा गया था कि,’घूंघट और बुर्का को छिपी हुई आंखों से महिलाओं को बचाने के लिए पहनना जरूरी होता है, इस्लाम में डिजाइनर बुर्का पहनने की सख्त मनाही है।’ देवबंद उलेमाओं ने एक प्रतियोगिता में गीता के श्‍लोकों को पढने वाली मेरठ की 15 वर्षीय आलिया खान नामक लड़की की भी आलोचना की थी। इस लड़की ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में भगवत गीता के श्‍लोक का सस्वर पाठ किया था। आलिया ने इस प्रतियोगिता में पुरस्कार भी जीता था।

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