चेन्नई। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि केंद्र सरकार के विमुद्रीकरण और जीएसटी सहित अन्य फैसलों से आने वाले वर्षों में सकारात्मक प्रभाव प़डने की संभावना है। उन्होंने गुरुवार की सुबह चेन्नई में आयोजित भारतीय निर्यात संगठन फेडरेशन ऑफ द इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन (एफआईईओ) के दक्षिणी क्षेत्र निर्यात उत्कृष्टता पुरस्कार के चौथे और पांचवे संस्करण के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही।उन्होंने कहा कि मुझे इन शुरुआती कठिनाइयों से पता चल गया है कि इन कदमों के कारण निर्यातकों का मुश्किलों का सामना करना प़ड रहा है। हालांकि, मुझे यकीन है कि वह शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान कर लेंगे। उप राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के निर्यातकों को सौर उत्पादों सहित नए बाजारों और उत्पादों पर ध्यान देने की जरूरत है जो बिजली, इलेक्ट्रॉनिक, दूरसंचार उपकरणों सहित वैश्विक व्यापार में अच्छा व्यपार कर रहे हैं। इसके साथ ही कृषि-संसाधित भोजन और श्रम संबंधी उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने की अभी आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास के लिए आम आदमी को मदद करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राचीन समय में भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एक प्रमुख खिला़डी था और सभी को सामूहिक रूप से मिलकर देश को आज के वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक स्थान पर पहुंचाने के लिए कार्य करना चाहिए। वेंकैया नायडू ने कहा कि लोगों को कई भाषाओं को जानने के लिए खुला होना चाहिए। हालांकि मातृभाषा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोगों को भी अलग-अलग भाषा सीखने के लिए तैयार होना चाहिए और उन्हें ऐसा करने से नहीं रोकना चाहिए। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के दौरान उत्तर भारतीय लोगों को कम से कम एक दक्षिण भारतीय भाषा सीखने के लिए कहा है। इस अवसर पर राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने कहा कि हाल में जीएसटी को जिस प्रकार देश के सभी राज्यों ने स्वीकार किया उससे सरकार का मनोबल बढा है। सांख्यिकीय रूप से, दक्षिणी क्षेत्र के राज्यों ने कुल निर्यात का लगभग एक चौथाई योगदान दिया है और एक अनुमान के अनुसार यह अगले पांच वर्षों में ३० प्रतिशत की बढोत्तरी करेगा। दक्षिणी राज्यों में, तमिलनाडु सबसे ब़डा योगदानकर्ता है जिसके दक्षिणी राज्यों से हुए योगदान में ५० प्रतिशत का योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि दक्षिणी क्षेत्र में अपार क्षमता उपलब्ध है। सरकार दक्षिणी राज्यों में स्थित बंदरगाहों के विकास के लिए कार्य कर रही है। भारत के व्यापार में दक्षिणी क्षेत्र का योगदान बढाना आवश्यक है।

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