नई दिल्ली/वार्ताकेंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम (सीपीएसयू) अपने आपसी तथा सरकार के अन्य विभागों के साथ वाणिज्यिक विवादों के लिए अदालत नहीं जा सकेंगे और उन्हें केंद्रीय कैबिनेट के निर्णय को अंतिम समाधान के तौर पर स्वीकार करना होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के सरकार के अन्य विभागों के साथ वाणिज्यिक विवादों के समाधान के लिए दो स्तरीय प्रणाली बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि नई प्रणाली मौजूदा स्थाई मध्यस्थता प्रणाली का स्थान लेगी। नई प्रणाली के अनुसार सभी वाणिज्यिक विवाद संबंधित उपक्रमों के प्रशासक मंत्रालयों के सचिवों की समिति को भेजा जाएगा। इसमें न्याय विभाग का सचिव भी सदस्य रहेगा। समिति इस विवाद को निपटारा तीन महीने के भीतर करेगी। प्रसाद ने बताया कि अगर समिति का समाधान किसी उपक्रम को मान्य नहीं होता है तो पूरा मामला कैबिनेट सचिव को भेजा जाएगा। इस संबंध में कैबिनेट सचिव का फैसला अंतिम होगा। उन्होंने नई प्रणाली रेलवे, आयकर, तथा उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग से संबंधित मामलों पर भी लागू होगा। उन्होंने कहा कि इससे केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के विवादों का समाधान तेजी से होगा और अदालती प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।

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