चेन्नई। केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोमवार को यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है और इसे छह सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। केंद्रीय जल राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार कावेरी प्रबंधन बोर्ड (सीएमबी) के गठन की प्रक्रिया निर्धारित समय के अनुसार पूरा करने का कार्य तेजी के साथ किया जा रहा है।मेघवाल ने चेन्नई हवाई अड्डे पर जब संवाददाताओं ने उनसे कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के बारे में टिप्पणी देने के लिए कहा तो उन्होंने कहा ‘प्रक्रिया चालू है…।’’ ज्ञातव्य है कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन का कर्नाटक सरकार द्वारा विरोध किया जा रहा है इसके साथ ही कर्नाटक की कई विपक्षी पार्टियां भी इस बोर्ड के गठन के पक्ष में नही है। इस बोर्ड का कार्य कावेरी नदी के पानी के समुचित हिस्से का बंटवारा कावेरी विवादा में शामिल राज्यों के बीच करना और राज्यों द्वारा कावेरी नदी से छो़डे गए पानी पर नजर रखना होगा।हालांकि मेघवाल से जब पत्रकारों ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड की तिथि बताने के लिए कहा तो उन्होंने तिथि नहीं बताई। उन्होंने कहा कि छह सप्ताह के अंदर कार्य पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है और हो सकता है कि यह कार्य इससे पहले भी पूरा हो जाए लेकिन छह सप्ताह के अंदर निश्चित तौर पर इस बोर्ड का गठन हो जाएगा। केन्द्रीय मंत्री मौजूदा का यह बयान मौजूदा समय में काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में राज्य के दौरे पर आए उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी और केन्द्रीय स़डक परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने यह कहा था कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन आसान नहीं है। मौजूदा समय में राज्य की लगभग सभी पार्टियां सत्तारुढ अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनातांत्रिक गठबंधन सरकार के बीच अच्छे संबंधों का हवाला देते हुए राज्य सरकार पर कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन के लिए केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने की मांग कर रही है। सर्वोच्च न्यायालय कावेरी जल के बंटवारे से संबंधित मामले में अपने आखिरी आदेश में तमिलनाडु को पूर्व में कर्नाटक से मिल रहे पानी के हिस्से को कम कर दिया था लेकिन केन्द्र सरकार को निर्देश दिया था कि छह सप्ताह के अंदर कावेरी प्रबंधन बोर्ड का गठन किया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस बोर्ड का गठन होने के बाद कर्नाटक हमेशा की तरह तमिलनाडु को पानी देने में विलंब नहीं कर पाएगा।

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