नई दिल्ली/भाषादिल्ली की एक अदालत ने उस याचिका को बिल्कुल महत्वहीन कहकर खारिज कर दिया जिसमें पुलिस को संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ अपने नाम एंटोनियो माइनो गांधी की जगह उपनाम का इस्तेमाल करने के लिये प्रतिरूपण द्वारा छल करने के आरोपों में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट समर विशाल ने उत्तर प्रदेश के एक वकील की निजी शिकायत खारिज कर दी। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि यह आरोप लगाने का कारण यह था कि नागरिकता प्रमाण पत्र पर एक स्थान पर उन्होंने नागरिकता हासिल करने वाले के नाम के स्थान पर एंटोनिया माइनो गांधी ’’ के तौर पर हस्ताक्षर किया था। इसे प्रतिरूपण नहीं कहा जा सकता क्योंकि कोई व्यक्ति जैसे चाहे वैसे हस्ताक्षर कर सकता है। अदालत ने कहा, नागरिकता प्रमाण पत्र उन्हें सोनिया गांधी उर्फ एंटोनिया माइनो, पत्नी राजीव गांधी के तौर पर दिया गया था, जैसा शिकायतकर्ता द्वारा खुद दाखिल नागरिकता प्रमाण पत्र से दिखता है। अदालत ने कहा, एंटोनिया माइनो गांधी के तौर पर उनके हस्ताक्षर को प्रतिरूपण नहीं कहा जा सकता है क्योंकि कोई व्यक्ति जैसे चाहे उस तरीके से हस्ताक्षर कर सकता है। यह जरूरी नहीं है कि कोई व्यक्ति अपने नाम से ही हस्ताक्षर करे। इसलिये यह प्रतिरूपण का मामला नहीं है। अदालत ने कहा, शिकायत में ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के साथ प्रतिवादी सोनिया गांधी ने हमशक्ल बनकर धोखाध़डी की। चूंकि धोखाध़डी के कोई आरोप नहीं हैं, इसलिये आईपीसी की धारा ४१६ के तहत दंडनीय अपराध प्रतिरूपण के जरिये छल के अपराध का मामला नहीं बनता है। अदालत ने कहा कि पंजीकरण प्रमाणपत्र सोनिया गांधी को अवश्य नियम और कानून के अनुसार दिया गया होगा। न्यायाधीश ने कहा, शिकायतकर्ता को इस तरह की महत्वहीन दलील के आधार पर इतने लंबे समय के बाद इसे चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है कि उनके द्वारा किया गया हस्ताक्षर पंजीकरण प्रमाण पत्र पर उनके नाम से मेल नहीं खाता है। मौजूदा शिकायत पूरी तरह महत्वहीन प्रकृति की है और इस प्रकरण में कोई अपराध का मामला नहीं बनता है। न्यायाधीश ने कहा, इसलिए यह अदालत प्रतिवादी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का कोई आदेश नहीं दे सकती है क्योंकि शिकायत में कोई अपराध नहीं बनता है। मैं शिकायत को संज्ञान लेने के लिये भी उचित नहीं मानता हूं क्योंकि इस मामले में प्रतिवादी द्वारा कोई अपराध किये जाने का खुलासा नहीं किया गया है।अधिवक्ता अशोक पांडे ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि नागरिकता रिकॉर्ड में सोनिया गांधी का उल्लेख उर्फ या उपनाम ’’ के तौर पर किया गया है जबकि नागरिकता देने के लिये मूल नाम के तौर पर एंटोनिया माइनो गांधी का उल्लेख है। उन्होंने आरोप लगाया था कि अपने परिवार को हासिल राजनैतिक ताकत का इस्तेमाल करके संप्रग अध्यक्ष ने मतदाता सूची और अन्य दस्तावेजों में मूल नाम एंटोनिया माइनो गांधी का इस्तेमाल नहीं किया।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY