नई दिल्ली/वार्तासरकार ने अनुसूचितजाति/अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारणकानून में ढील दिए जाने और आरक्षण समाप्त करने कीअफवाहों को पूरी तरह से बेबुनियाद करार देते हुए देशवासियोंसे शांति व्यवस्था और आपसी भाईचारा बनाए रखने की आजअपील की। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भारत बंद के दौरान हुई हिंसा पर लोकसभा में बयान दिया। गृहमंत्री ने कहा कि वह समझते हैं कि उच्चतम न्यायालय द्वाराएससी/एसटी अत्याचार निवारण कानून को लेकर जो फैसलादिया गया है, उससे लोगों में रोष है, लेकिन इस मामले मेंकेन्द्र सरकार पक्षकार नहीं थी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकारअनुसूचित जाति एवं जनजाति समुदाय के लोगों को संविधानमें दिए गए संरक्षण को कायम रखने के प्रति पूरी तरह सेवचनबद्ध है। सिंह ने कहा कि सरकार ने इस कानूनमें कोई ढील नहीं दी है, बल्कि वर्ष २०१५ में इस कानून मेंसंशोधन करके इसे और म़जबूत बनाया है। उन्होंने कहा किसंशोधन करके इसमें नए प्रावधान जो़डे गए और गवाहों कोसुरक्षा दिलाने का भी प्रावधान किया गया ताकि गवाहों को जोरजबरदस्ती से चुप न कराया जा सके। इसके अलावा पीि़डतों कोमिलने वाली राशि में भी इजाफा कराया गया है। इसके साथ हीइस कानून के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले सरकारीअधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने का भी प्रावधान कियागया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने उच्चतमन्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करनेका फैसला किया और मात्र छह कामकाजी दिनों में समस्तप्रक्रियाएं पूरी करके कल याचिका दायर भी कर दी गई।सरकार के अनुरोध पर इस याचिका पर आज दोपहर दो बजे सेसुनवाई भी आरंभ हो जाएगी।

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