बेंगलूरु/दक्षिण भारत वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि प्रधाननमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार और विधि आयोग द्वारा प्रस्तावित ’’एक देश, एक चुनाव’’ की सोच लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है। वह गुरुवार को शहर में आयोजित एक बहस सत्र को संबोधित कर रहे थे। अपनी बात रखते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री रमेश ने कहा, ’’हमारे देश में कई भाषाएं बोली जाती हैं, विभिन्न संस्कृतियां पाई जाती हैं, हर व्यक्ति की अपनी अलग राजनीतिक सोच और पसंद है। ऐसे में ’’एक देश, एक चुनाव’’ पूरी तरह से एक निरर्थक बात है। अगर इस सोच को व्यवहार में तब्दील करने की अनुमति दी गई और सभी संसदीय और विधानसभा चुनाव एक ही साथ करवाने की परंपरा चल प़डी तो यह देश को चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों सौंप देने जैसा कदम होगा।’’ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि वह जर्मन तानाशाह हिटलर के सिद्धांतों को भारत में लागू करने की कोशिश कर रहे हैं्। पहले उन्होंने जीएसटी लागू करते वक्त ’’एक देश, एक कर’’ का नारा दिया और अब वह ’’एक देश, एक चुनाव’’ का नारा ल गा रहे हैं। रमेश ने कहा, ’’वर्ष १९३० में हिटलर ने ’’एक देश, एक वर्ग और एक नेता’’ का नारा दिया था ओर अब मोदी हिटलर का अनुकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।’’ जयराम रमेश ने मोदी की इस सोच का विरोध करते हुए कहा कि देश में ढाई लाख ग्राम पंचायत हैं, हर राज्य की अपनी विधानसभा है और एक साथ सभी चुनाव करवाने के बारे में हर राज्य अपने-अपने इलाकों के हालात के मद्देनजर अलग-अलग राय रखता है। रमेश ने कहा, ’’वहीं, आरएसएस, भाजपा और संघ परिवार आगे ब़ढकर देश की आकर्षक विविधता को समाप्त कर सबकुछ एक ही मेल का बनाने की कोशिश करने में जुटे हैं्। इसका राष्ट्रीय अखंडता पर काफी बुरा असर प़ड सकता है।’’ उन्होंने कहा कि हाल के चुनावों में कांग्रेस ने जीत हासिल करने के इरादे से हिस्सा नहीं लिया, बल्कि भारतीय लोकतंत्र के आधारभूत सिद्धांतों की रक्षा करने के लिए चुनाव ल़डने का निश्चय किया। उन्होंने कहा कि अगर मोदी की ’’एक देश, एक चुनाव’’ की पहल सफल हो गई तो यह देश में क्षेत्रीय दलों का भविष्य पूरी तरह से चौपट कर देगी।

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