लंदन। ब्रिटिश कैबिनेट कार्यालय की गोपनीय फाइलों को प्रकट करने के लिए सूचना की स्वतंत्रता (एफओआई) के तहत आवेदन पर ब्रिटेन का एक न्यायाधिकरण अपनी व्यवस्था देगा। समझा जाता है कि ब्रिटिश कैबिनेट कार्यालय की गोपनीय फाइलों में वर्ष १९८४ में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में ब्रिटेन की कथित संलिप्तता के बारे में जानकारी है। फर्स्ट टायर ट्रिब्यूनल (सूचना का अधिकार) की तीन दिन की सुनवाई मंगलवार से लंदन में होगी जिसमें बहस की जाएगी कि क्या ब्रिटेन के सूचना आयुक्त को कैबिनेट कार्यालय का, फाइलों को सार्वजनिक करने की अनुमति न देने का फैसला बरकरार रखने का अधिकार है। अपील पर फ्रीलांस पत्रकार फिल मिलेर की ओर से केआरडब्ल्यू ला द्वारा पक्ष रखा जा रहा है। फिल मिलेर इस बात की जांच कर रहे हैं कि अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए अभियान में तत्कालीन मार्गरेट थैचर की अगुवाई वाली सरकार ने किस तरह से सहायता की थी। मिलेर ने कहा, एफओआई की अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि यह जानना जनहित में है कि वर्ष १९८४ की त्रासदपूर्ण घटनाक्रम में ब्रिटेन की संलिप्तता किस तरह की थी। ब्रिटेन और भारत में सूचना का अधिकार कानून है जो राष्ट्रीय अभिलेखागारों में लोक पहुंच के महत्व को रेखांकित करता है। वर्ष २०१४ में ब्रिटिश सरकार के दस्तावेजों से खुलासा हुआ था कि ऑपरेशन ब्लू स्टार से पहले भारतीय फौजों को ब्रिटिश सेना ने परामर्श दिया था। ये दस्तावेज ३० साल तक गोपनीय रखने के बाद सार्वजनिक करने के नियम के तहत सामने लाए गए थे।

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