putin and modi
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नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच बहुचर्चित एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम के सौदे पर मुहर लग गई है। यह देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण रक्षा सौदों में से एक है। इस पर अमेरिका सहित पाकिस्तान और चीन की भी कड़ी नजर है, क्योंकि एस-400 सिस्टम भारत को मिलने के बाद हमारी सेना और ज्यादा ताकतवर हो जाएगी।

इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खूबियों से भारतीय सेना देश की सुरक्षा और ज्यादा ताकत के साथ कर सकेगी। यह एक ऐसी रक्षा प्रणाली है जो हवा में ही दुश्मन की कई मिसाइलों को तबाह कर सकती है। चूंकि भारत की सुरक्षा को चीन और पाकिस्तान से खतरा रहा है। ऐसे में एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम हमारी रक्षा व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।

भारत यात्रा पर आए रूस के राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ पुतिन की गले मिलने की फोटो सोशल मीडिया में खूब शेयर की जा रही हैं। इस सौदे को लेकर दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मोदी और पुतिन के बीच बातचीत हुई।

एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर भारत के करीब 5 अरब डॉलर खर्च होंगे। इस महत्वपूर्ण सौदे के अलावा भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष में सहयोग को लेकर भी समझौता हुआ है। इसके तहत रूस में साइबेरिया के शहर नोवोसबिरस्क में मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किया जाएगा।

भारत को मिलेगा अचूक रक्षाकवच: उल्लेखनीय है कि रूस का एस-400 अमेरिका का थाड दोनों ही एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम हैं, लेकिन दोनों में काफी फर्क है। एस-400 ज्यादा खूबियों और मारक क्षमता से लैस है। इस बहुप्रतीक्षित सौदे पर प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर किए।

एस-400 करीब 300 किमी दूर के लक्ष्य को आसानी से निशाना बनाकर तबाह कर सकता है। यह कई तरह के डिफेंस सिस्टम में अत्यंत कारगर है। इसके अलावा यह 4,800 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आ रही मिसाइल को लक्ष्य बनाकर उसे खत्म कर सकता है। थाड की क्षमता सिर्फ 3,000 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार वाले टारगेट तक ही है। एस-400 आसामान से आ रहे एकसाथ 100 खतरों का पता लगाने में सक्षम है। यह अमेरिका के छह एफ-35 लड़ाकू विमानों को एकसाथ तबाह कर सकता है।

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