नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी के बीच शुक्रवार को यहां आतंकवाद, सुरक्षा, व्यापार व ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बातचीत हुई। इसके बाद दोनों पक्षों ने नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए जिनमें चाबहार पोर्ट के एक हिस्से के परिचालन के लिए पट्टे पर अनुबंध भी शामिल है। दोनों नेताओं ने विस्तृत बातचीत के दौरान क्षेत्रीय हालात पर भी चर्चा की और दोनों ने शांतिपूर्ण, स्थिर, संपन्न तथा बहुवादी अफगानिस्तान की जरूरत पर जोर दिया।रूहानी के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि दोनों देश आतंकवाद मुक्त दुनिया का सपना देखते हैं और वे आतंकवाद, चरमपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय अपराधों को ब़ढाने वाली ताकतों के विस्तार को रोकने को प्रतिबद्ध हैं। रूहानी ने कहा, हम आतंकवाद एवं चरमपंथ से ल़डने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को राजनयिक व राजनीतिक पहलों के जरिए ही सुलझाया जाना चाहिए लेकिन उन्होंने किसी विशेष क्षेत्रीय विवाद का जिक्र नहीं किया।दोनों पक्षों ने नौ समझौतों पर दस्तखत किए जिसमें दोहरे कराधान से जु़डा एक समझौता भी शामिल है। ईरान के पोर्ट एंड मेरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन तथा इंडिया पोर्टस ग्लोबल लिमिटेड के बीच चाबहार स्थित शाहिद बेहशती पोर्ट के १८ महीने के लिए परिचालन का अनुबंध किया गया। अन्य समझौतों में दोहरे कराधान से बचाव तथा वित्तीय चोरी रोकने का समझौता शामिल है। इसी तरह दोनों पक्षों ने राजनयिक पासपोर्ट धारकों को वीजा अनिवार्यता से छूट देने तथा व्यापार बेहतरी के लिए विशेषज्ञ समूह बनाने का भी एक समझौता किया है। अधिकारियों का कहना है कि रूहानी की इस यात्रा के दौरान इन नौ समझौतों के अलावा दोनों देशों के बीच चार और समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। मोदी ने कहा कि ईरानी राष्ट्रपति की यात्रा दिखाती है कि दोनों देश कैसे संपर्क सहित प्रमुख क्षेत्रों में अपने सहयोग को मजबूत बनाना चाहते हैं। उन्होंने चाबहार बंदरगाह की महत्ता को भी रेखांकित किया और कहा कि इससे अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक बेहतर पहुंच में मदद मिलेगी।

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